देश के प्रधान मन्त्री नरेन्द्र मोदी! कहाँ छुपे हो?

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
(प्रख्यात भाषाविद्-समीक्षक)

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय


हमारे चार सैनिकों की हत्या आज (१३ जून, २०१८ ई०) पाकिस्तान ने कर दी है, जिसके लिए ‘तुम’, सिर्फ़ ‘तुम’ उत्तरदायी हो। तुम्हारी रक्षा और विदेशनीतियाँ निहायत खोखली हैं। न तुम्हारी सरकार ‘रमज़ान’ के नाम पर देशद्रोही पार्टी ‘पी०डी०पी०’ के सम्मुख घुटने टेकती और न हमारे सैनिक मारे जाते। सत्ता की राजनीति के लिए ‘तुम’ किसी भी हद तक गिर सकते हो, देश की जनता अब धीरे-धीरे तुम्हारे वास्तविक चाल-चरित्र-चेहरे को समझने लगी है और जो अभी तक तुम्हारा गुणगान कर रहे हैं; तुम्हारा विकल्प पूछ रहे हैं, देर-सवेर वे भी तुम्हारे कर्मों के यथार्थ से अवगत हो जायेंगे; क्योंकि तुम्हारे कर्मों का लेखा-जोख़ा ही अनेक ‘विकल्प’ प्रस्तुत करनेवाला है।

तुम अब तक के सबसे घातक प्रधान मन्त्री साबित होनेवाले हो। तुमने प्रत्येक स्तर पर आम ज़िन्दगी को तहस-नहस कर डाला है। तुमने अपने आर्थिक शिकंजे में उसे इतना कस दिया है कि देश की जनता छटपटा रही है। हिन्दुओं की बौद्धिकता का तुमने इतना शोषण कर लिया है कि वे तथाकथित ‘हिन्दुत्व’ के प्रति अभी तक सम्मोहित हैं। तुमने सबसे अधिक हिन्दुओं की क्षति की है; उनकी भावना-संवेदना का दोहन किया है; उनकी दैहिक-दैविक-भौतिक शक्ति को तुमने ‘हिन्दू-समुदाय को बाँटो और चैन से सत्ता की राजनीति करो’ की अपनी गर्हित नीति के अन्तर्गत शिथिल और घायल करते हुए, उनकी सामाजिक सत्ता और महत्ता का अधिग्रहण करते हुए, उन्हें नितान्त अशक्त बना दिया है।

नरेन्द्र मोदी अपने ही देश में आठ राज्यों में हिन्दू अल्पसंख्यक बने हुए हैं और ‘तुम्हारी सरकार’ ‘हिन्दू अल्पसंख्यक’ आयोग का गठन तक नहीं करा सकी? तुम हिन्दुओं के कैसे हितैषी हो?

तुम्हारे अब तक के कृत्य लोकतन्त्र और वास्तविक राष्ट्रवाद के लिए ‘महाघातक’ सिद्ध हो रहे हैं। यही कारण है कि तुम ‘आदरसूचक’ शब्द-योग्य अब रह नहीं गये। तुम्हें मालूम है नरेन्द्र मोदी! तुम कितने कायर हो! कहाँ विलुप्त हो गये तुम्हारे वे वाक्य, जिसमें तुमने कहा था,”हमारी सरकार बनेगी तो एक के बदले दस सिर लायेंगे।” बार-बार धिक्कार है, तुम्हारी घृणित वचनबद्धता को!
तुम देश के चौकीदार हो; तुम देश के प्रधान जनसेवक हो। वाह नरेन्द्र मोदी वाह! तुम्हारी ही जातिसूचकवाला ‘नीरव मोदी’ देश में लूटकर तुम्हारी नाक के नीचे से देश से बाहर निकल आया और तुम्हारी ‘चौकीदारी’ ‘धरी-की-धरी’ रह गयी। ऐसे में, तुम्हारी विश्वसनीयता पूर्णत: सन्देह के घेरे में है।

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