केन्द्र और महाराष्ट्र के शासन-संचालक महाराष्ट्र की स्थानीय चुनौतियों का सामना करने से भयभीत क्यों हैं ?

भाषाविद्-समीक्षक डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय-

आश्चर्य का विषय है कि चुनाव राज्यों के लिए हो रहे हैं और राज्यों की जनता के मन-मस्तिष्क में ‘अनुच्छेद ३७०’, ‘भारत-पाकिस्तान’, ‘आतंकवाद और काँग्रेस’ आदिक अप्रासंगिक विषयों का विष भरा जा रहा है और मूल विषय को नेपथ्य में डाल दिया गया है।

★ नरेन्द्र मोदी, अमित शाह तथा देवेन्द्र फड़नवीस! हमें उत्तर दीजिए :--
० देश में सर्वाधिक महाराष्ट्र के किसानों ने आत्महत्या क्यों की है? उनकी दशा सुधारने के लिए 'महाराष्ट्र-शासन' ने क्या किया है?
० सावरकर को 'भारतरत्न' दिये जाने का विरोध करनेवालों के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमन्त्री कहते हैं :-- डूब मरो चुल्लूभर पानी में!" फड़नवीस वर्षों से मुख्यमन्त्री हैं, ऐसे में, क्या फड़नवीस को "चुल्लूभर पानी में" डूब नहीं मरना चाहिए, जिन्हें चुनाव आते ही 'सावरकर' याद आने लगे हैं?
० क्या यह सच नहीं है, दामोदर वीर सावरकर ने अँगरेज़ों के समक्ष आत्मसमर्पण किया था?
० क्या यह सच नहीं है, महाराष्ट्र में बच्चों को बताया जा रहा है, महात्मा गांधी ने 'आत्महत्या' की थी?
० महाराष्ट्र-शासन इस समय न्यूनतम साढ़े चार लाख करोड़ रुपये घाटे में चल रही है, क्या यह सच नहीं है?
० महाराष्ट्र के मुख्यमन्त्री की सभा में एक किसान ने आत्महत्या क्यों की थी?
० महाराष्ट्र की बेहद घटिया सड़क-मार्ग पर सत्ताधारी मौन क्यों हैं?
० महाराष्ट्र के जिस 'पी० एम० सी०' बैंक में घोटाले के कारण जमा की गयी धनराशि के डूबने के भय से आघात पहुँचने के कारण अब तक तीन उपभोक्ताओं की मृत्यु हो चुकी है, उस बैंक के अनेक निदेशक और अन्य अधिकारी 'राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ' के साथ सीधे जुड़े हुए हैं, इस पर केन्द्र और महाराष्ट्र-शासन के संचालक मौन क्यों साधे हुए हैं?
० महाराष्ट्र के शिक्षित बेरोज़गार युवावर्ग पर सरकार मुँह क्यों नहीं खोल रही है?
० आर्थिक मुद्दे पर तथाकथित नरेन्द्र मोदी की सरकार पूरी तरह से विफल है, जिसकी पूर्ति के लिए देश के जनसामान्य के 'आर्थिक जीवन' में सेंध लगायी जा रही है, इस संवेदनशील विषय पर सरकार मौन क्यों है?
० अडानी-अम्बानी को सर्वोपरि प्राथमिकता देते हुए, सर्वाधिक ऋण किस आधार पर दिया गया है, इस पर सरकार मौन क्यों है?

(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १८ अक्तूबर, २०१९ ईसवी)

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