संसद में काम ना होने पर देशव्यापी उपवास रखने वाले कठुआ और उन्नाव गैंगरेप पर चुप क्यों ?

अनुराग सिंह (पत्रकार)-


संसद में काम ना होने पर जिस पार्टी के सांसदों ने देशव्यापी उपवास रखा वो कठुआ और उन्नाव गैंगरेप पर चुप है । उन्नाव गैंगरेप को 261 दिन बीत गए आरोपी बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर खुलेआम धमकी दे रहा है । पीड़ित बेटी के पिता की हत्या करवाई जा रही है । SSP दफ्तर जाकर ये दिखा रहा है कि वो भगोड़ा नहीं है और यूपी पुलिस चुप है ।

कठुआ गैंगरेप पर बीजेपी मध्य प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष ये कह रहे हैं कि इसमें पाकिस्तान का हाथ है और पूरी पार्टी चुप है । सड़क से सदन तक चीखने वाली महिला नेता खामोश हैं । शिवराज चुप हैं । कांग्रेस ने रात में कैंडल मार्च निकाला तो कुछ भाई ज्ञान दे रहे हैं कि ऐसा दिन में करना ठीक रहता रात में ये कौन देखता है और बाकी भाई चुप हैं । मुझे लगता है कि ये कांग्रेस का अच्छा आइडिया है और सकारात्मक कदम भी, क्योंकि दिन में होने वाले प्रदर्शन लोगों के लिए मुसीबत बनते हैं और पार्टी के लिए दाग भी । रही बात भीड़ की तो सबसे ज़रूरी है सोशल जस्टिस जो सोशल साइट्स पर हो ही रहा है ।

लेकिन मैं पूछना चाहता हूं कि ज़रूरी मुद्दों पर सबसे ज़्यादा बोलने वाले नेताजी चुप क्यों हो जाते हैं । ललित मोदी 1900 करोड़ लेकर भागा, पार्टी खामोश हो गयी । विजय माल्या 9 हज़ार करोड़ लेकर भागा पार्टी खामोश हो गयी । नीरव मोदी 11 हज़ार करोड़ लेकर भागा पार्टी के मुंह पर ताला लग गया । विक्रम कोठारी 3700 करोड़, जतिन मेहता 6800 करोड़, ना जाने कितनी लंबी फेहरिस्त है लेकिन ना कोई ट्वीट ना कोई जवाब ।

ADR की रिपोर्ट कहती है कि बीजेपी देश की सबसे अमीर पार्टी है । यही रिपोर्ट ये भी कहती है कि सांसद बनने के बाद जनप्रतिनिधियों की आय 100 गुना से ज़्यादा बढ़ जाती है लेकिन पार्टी चुप है । सुप्रीम कोर्ट के सीनियर जजों को ये कहना पड़ रहा है कि सत्ता का गलत इस्तेमाल हो रहा है । कोई सुने या ना सुने मीडिया और कोर्ट को अपनी बात बुलंद आवाज़ में कहनी चाहिए । पर पार्टी चुप है । तो इस तस्वीर को देखिए और सोचिये ऊपर से नीचे तक कौन है जो आपकी बात सुनने के लिए बैठा है । सत्ता ऐसे ही पुलिस पर हाथ रखे हुए है और पुलिस सरेंडर है । धन्यवाद सोशल मीडिया हम भी तुम्हारे सहारे मन की बात कर लिया करते हैं । नहीं तो शायद कोई था ही नहीं सुनने के लिए ।

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