सई नदी की करुण कथा : पौराणिक और ऐतिहासिक नदी मर रही है

क्या जेल में निरुद्ध 02 लोगों तक ₹02 लाख और ज़हर की शीशी पहुंचाई गई ?

फाइल फोटो-संजय मिश्र

अंतर्ध्वनि एन इनर वॉइस क्राइम डेस्क-
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कल एसपी चन्द्र प्रकाश को एक प्रार्थना पत्र ऐसा दिया गया है, जिसमे 02 सगे भाइयों की जेल में हत्या की साजिश की बात कही गई है। दोनों भाई सुरसा ब्लॉक के पूर्व प्रमुख मलिहामऊ निवासी संजय मिश्रा के पिछले साल 28 दिसम्बर को हुए बहुचर्चित हत्याकाण्ड के अभियुक्त हैं। इनमे एक की पत्नी का कहना है कि पति और देवर की हत्या के लिए जेल में निरुद्ध 02 लोगों तक ₹02 लाख और ज़हर की शीशी पहुंचाई गई थी, जिसे कारागार अधीक्षक ने बरामद किया है।

20 दिसम्बर 2016 की सुबह संजय मिश्रा की गांव स्थित उनके कॉलेज में जघन्य हत्या कर दी गई थी। मामले में संजय के तीसरे नम्बर के भाई श्याम जी मिश्रा ने भदैचा की प्रधान के पति राजेन्द्र सिंह उर्फ़ राजू और उसके भाई अजय पाल सिंह उर्फ़ पहाड़ी के बेटों पवन व पंकज के विरुद्ध नामजद मुक़दमा लिखाया था। हालांकि, बाद में वारदात से पर्दा उठाते हुए पुलिस ने बताया था कि संजय की हत्या की साजिश राजू भदैचा ने बरेली जेल में रची थी। संजय का काम तमाम करने वाले शाहजहांपुर और बदायूं के थे और इनकी संख्या 06 थी। पुलिस वारदात अंजाम देने वालों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।

लेकिन, राजू भदैचा के भतीजे पवन की पत्नी अन्नपूर्णा ने इस मामले में कल एसपी को दरख्वास्त देकर जघन्य हत्याकाण्ड को प्रासंगिक कर दिया है। एसपी को दिए पत्र में अन्नपूर्णा ने पति और देवर को फ़र्ज़ी फंसाए जाने की बात कही है। लेकिन, इसके बाद जो तोहमत अन्नपूर्णा ने लगाई है, वह संवेदनशील तो है ही, अगर उसमे तनिक भी सच्चाई है तो जेल की व्यवस्था पर भी गम्भीर सवाल खड़े करती है।

बक़ौल अन्नपूर्णा- “24 मार्च को वह पति पवन और देवर पंकज से मिलाई करने जेल गई थी। उसी दिन संजय के भाई धनंजय अपने रिश्तेदारों पप्पू मिश्रा और कमल मिश्रा से मिलाई कर रहे थे। 26 मार्च को वह फिर पति व देवर से मिलने जेल पहुंची। पता चला कि धनंजय, दोनों की हत्या के लिए पप्पू और कमल को ₹02 लाख व ज़हर की शीशी देकर आए हैं। जानकारी जेल अधीक्षक को दी, तो उन्होंने दोनों से रकम और ज़हर बरामद किया। घटनाक्रम से साफ़ है कि धनंजय और उनके परिजन पवन व पंकज की हत्या करवाने को प्रयासरत हैं। लिहाजा धनंजय, पप्पू और कमल के विरुद्ध मुक़दमा पंजीकृत कर क़ानूनी कार्यवाही की जाए। पप्पू और कमल को अन्यत्र जेल स्थानान्तरित किया जाए। पवन और पंकज को सुरक्षा मुहैया कराई जाए।”

अलबत्ता, मामला पुलिस के गले नहीं उतर रहा। एक अधिकारी ने कहा कि ₹02 लाख जेल के भीतर पहुंचा पाना मुमकिन नहीं है। क्योंकि, जेल में समय समय पर प्रशासनिक अधिकारी जांच-पड़ताल करते रहते हैं। बहरहाल, माजरा क्या है पूरा, ये पुलिस की पड़ताल ही बताएगी।