‘भाषाशिक्षण-केन्द्र, इलाहाबाद इकाई’ की ओर से ‘विश्व हिन्दीभाषा-समारोह’ का आयोजन

शिक्षा-परीक्षा में दिख रही हिन्दीभाषा की दुर्दशा : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

कल (१० जनवरी, २०१९ ई०) ‘भाषाशिक्षण-केन्द्र’, इलाहाबाद इकाई की ओर से बाई के बाग़, इलाहाबाद में ‘विश्वहिन्दी-भाषा समारोह’ का आयोजन किया गया। अध्यक्षता कर रहे कालिकट विश्वविद्यालय के पूर्व-हिन्दीविभागाध्यक्ष डॉ० ए० अच्युतन ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में कहा, ” आज जो हिन्दी की स्थिति है, वह शोचनीय है। हमें अपने-अपने क्षेत्र के प्रत्येक शिक्षण-संंस्थानों में जाकर वहाँ से प्रकाशित हिन्दी के उन समाचारपत्रों के पत्रकारों के बाज़ारू हिन्दीभाषा-संज्ञान को शिक्षकों और शिक्षार्थियों के बीच सप्रमाण रखते हुए, उनके शैक्षिक भविष्य पर पड़नेवाले दुष्प्रभावों से उन्हें अवगत कराने की आवश्यकता है।” मुख्य अतिथि भाषाविद्-समीक्षक डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय का मत था, “आज हमारी हिन्दीभाषा, लिपि तथा वर्तनी की जो दुर्दशा की जा रही है, उसके लिए मैं लेखक, प्रकाशक, अध्यापक, मीडियातन्त्र तथा शासन को बराबर का भागीदार मानता हूँ। आज के अधिकतर लेखक ऐसे हैं, जिन्हें हिन्दीभाषा और व्याकरण की समझ ‘नहीं’ के बराबर है। इसकी परिणति आज प्रतियोगी और उच्चस्तरीय परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों में भाषिक अशुद्धियों को देखा जा सकता है।” आन्ध्र विश्वविद्यालय, विशाखापट्टनम् में हिन्दी की पूर्व-विभागाध्यक्ष डॉ० सुरपनेनि शेषत्नम् ने विशिष्ट अतिथि के रूप में कहा,”वास्तव में, हमने सच्चे दिल से हिन्दी को आगे बढ़ाने के लिए कोई काम नहीं किया है।”

डॉ० माधव नागदा ने कहा,”अपने बल पर हिन्दी-संवर्द्धन करनेवालों को हिन्दी के समर्थक भी प्रोत्साहन नहीं देते। सवाल है, हिन्दी में काम करनेवालों के लिए हम क्या कर रहे हैं?”

समारोह में डॉ० मधुरेन्द्र सिनहा, डॉ० रागिनी उपाध्याय, श्वेतांंक उपाध्याय, डॉ० अमरनाथ मिश्र, सरोज, विनीता यादव, सृष्टि पटेल, अनुज कुशवाहा आदिक उपस्थित थे। श्यामाशंंकर ने समारोह का संचालन किया।

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