विद्यार्थी लिखने का अभ्यास आरम्भ कर दें― आचार्य पं० पृथ्वीनाथ

भाषाविज्ञानी और वैयाकरण आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने ६ मई को ‘हिन्दी-संसार ऑन-लाइन’ शैक्षिक संस्थान, सलोरी, प्रयागराज के सभागार मे लगभग ८०० छात्र-छात्राओं को लगातार ८ घण्टे, फिर ऑन-लाइन लगभग २,००० विद्यार्थियों को डेढ़ घण्टे तक सम्बोधित करते हुए, भाषा, साहित्य, व्याकरण तथा संरचना-विषय पर बहुविध प्रकाश डाला था। उन्होंने बताया कि प्राय: विद्यार्थी समुचित शब्दार्थ के अभाव मे अपना वाक्य-विन्यास अशुद्ध कर बैठते हैं। आप सभी को प्रतिदिन साहित्य, संस्कृति, विज्ञान, समाज, अर्थ आदिक विषयों पर एक संक्षिप्त निबन्ध लिखना चाहिए, फिर लिखित प्रत्येक वाक्य को व्याकरण की कसौटी पर कसना चाहिए।

आरम्भ मे उक्त संस्था के निदेशक डॉ० अशोक स्वामी ने मुख्य अतिथि और मार्गदर्शक आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय को शाल ओढ़ाकर स्मृतिचिह्न भेंट किया था और स्वागत भी।

इस अवसर पर आचार्य ने विद्यार्थियों को सारलेखन, सारांशलेखन, भावपल्लवन,विरामचिह्न, पुनरुक्ति-दोष, द्विरुक्ति-दोष, सुघटित वाक्य-विन्यास, व्याप्ति-अतिव्याप्ति, वर्ण-अक्षर, ‘र’ के रूप आदिक को समझाया था। अयोगवाह-उच्चारण, ह्रस्व-दीर्घ मात्राप्रयोग, संक्षिप्तीकरण, शब्दभेद-विभेद पर सोदाहरण प्रकाश डाला था। उन्होंने सैकड़ों अशुद्ध शब्दों को शुद्ध करते हुए, उनका वाक्य मे प्रयोग किया था। जब-तब, यदि-तो, यद्यपि-तथापि, शंका-समाधान, जिज्ञासा-शमन, भव-भव:, शत-प्रतिशत-प्रतिशत, दिनप्रतिदिन-प्रतिदिन, आद्यन्त-आद्योपान्त, शत-शत-शत्-शत्, जन्मदिन,जन्मतिथि-जयन्ती, आवास-प्रवास, आप्रवास, अप्रवास, अनिवास, अधिवास आदिक सैकड़़ो शब्दों की सार्थकता और निरर्थकता को सकारण समझाते हुए, विद्यार्थियों का भ्रम दूर किया था। बड़ी संख्या मे छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर प्रश्न-प्रतिप्रश्न करते रहे और आचार्य संयत रहकर उत्तर देते रहे। कुल मिलाकर, वह ऐतिहासिक आयोजन था।

सभी छात्र-छात्राओं ने तन्मयतापूर्वक प्रशिक्षण ग्रहण किया था और सभी के चेहरे पर एक अभूतपूर्व कान्ति दिख रही थी।

इस शैक्षिक आयोजन की व्यवस्था मे प्रबन्धक मनोज स्वामी, सह-प्रबन्धक ब्रजकिशोर स्वामी, विपिन यादव, शिवम, बलभद्र यादव, अभिषेक यादव तथा रोहित की विशेष भूमिका रही।