नरेन्द्र मोदी ने ‘नारी-सम्मान’ को दरकिनार कर, ‘अम्बेदकर मेमोरियल’ का उद्घाटन किया!

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
(प्रख्यात भाषाविद्-समीक्षक)

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय


आज, जब बहुत बड़ी संख्या में देशवासी देश के राजनेताओं-द्वारा किये जा रहे नारीशक्तिमान-मर्दन के विरुद्ध खड़े हुए हैं और सरकार से प्रश्न कर रहे हैं :– देश की बेटियों का शीलहरण करनेवालों को फाँसी की सज़ा दिलवाओ और नारी की सुरक्षा सुनिश्चित करो तब देश के प्रधान मन्त्री नरेन्द्र मोदी मेट्रो में सवार होकर अम्बेडकर की जन्मतिथि की पूर्व-सन्ध्या पर ‘अम्बेडकर मेमोरियल’ का उद्घाटन करने के लिए पहुँच गये थे।
यह किसी देश के प्रधान मन्त्री का नितान्त निन्दनीय और सत्ता की राजनीति को ध्वनित करनेवाला आचरण है। ऐसा इसलिए कि आज जब सम्पूर्ण देश का नागरिक, विशेषत: नारी-जाति उन्नाव (उत्तरप्रदेश) और कठुआ (जम्मू-कश्मीर) में मनुष्यता को तार-तार करनेवाले और मानव-सभ्यता को कलंकित करनेवाले कृत्य को लेकर आक्रोशित, उद्विग्न तथा चिन्तित है तब देश का मुखिया तथाकथित दलितों के वोट में सेंध लगाने की नीति और नीयत से दलितों के मसीहा अम्बेडकर के नाम पर जश्न मना रहा है।
आज देश की जनता मर्मप्रान्त को बेधनेवाली उक्त दोनों घटनाओं को लेकर आहत मन से प्रधान मन्त्री से स्पष्टीकरण की माँग रही है, किन्तु चतुर-चालक नरेन्द्र मोदी अपने मूल दायित्व को भूलकर दलितों की राजनीति करने पहुँच गये?
नरेन्द्र मोदी के लिए यह श्रेयस्कर होता, यदि उपर्युक्त घटनाओं के सन्दर्भ में वे अपने सभी कार्यों को स्थगित कर, आज देश के सामने उपस्थित होकर ‘देशवासियों के नाम प्रधान मन्त्री का सन्देश’ के माध्यम से सीधे उन पर लग रहे “बेटी बचाओ-बेटी बढ़ाओ” और “नारी-सम्मान लौटायेंगे” की ज़ुम्लेबाज़ी करने के आरोप पर अपना पक्ष रखते, परन्तु उन्होंने ऐसा न कर, अपने भीतर ‘अपराध-बोध’ का अनुभव न होने को प्रमाणित कर दिया है‌।