डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

(प्रख्यात भाषाविद्-समीक्षक)
आज देश में जिस प्रकार की राजनीतिक प्रवृत्ति दिख रही है, वह भारतीय लोकतन्त्र के स्वास्थ्य के लिए अतीव घातक सिद्ध हो रही है। सभी राजनीतिक दल ‘लोकतन्त्र’ की भट्ठी में ‘दलित ब्राण्ड’ तन्दूरी सेंकने में लगे हैं और ‘आरक्षण’ की छौंक देकर ‘पिछड़ा वर्ग’ ब्राण्ड की दाल फ्राई कर रहे हैं और ‘सत्ता की राजनीति’ में सभी राजनीतिक दल के पण्डे तरह-तरह के हथकण्डे अपनाकर भारतीय समाज की आधारशिला को ध्वस्त करने में लगे हुए हैं।
समय की माँग है कि ऐसे सभी राजनीतिक दलों के समानान्तर ‘एक अराजनीतिक संघ बने, जिसके अन्तर्गत देश के दूषित और समाजघाती राजनीतिक दलों के अलोकतान्त्रिक कृत्यों का विरोध हो। नवगठित संघ भारतीय समाज के उत्थान के लिए रचनात्मक कार्य कराये। वह संघ राजनीति को परिष्कृत करने का कार्य भी करे। उसका नाम ‘राष्ट्रीय विकल्प-संघ’ हो। यह तभी सम्भव है जब देश की ८० प्रतिशत नागरिक उस संघ के सक्रिय सदस्य हों और यह शनै:-शनै: चलनेवाली एक प्रक्रिया है।
‘राष्ट्रीय विकल्प-संघ’ के तत्त्वावधान में तीन स्तरों पर कार्य हो :— पहला स्तर, राष्ट्रीय विचारकों का हो, जो कार्य-योजना बनाये और लागू करने के तरीक़े बताये; दूसरा स्तर, योजनाओं का प्रचार-प्रसार करे और जन-सम्पर्क करे तथा तीसरा स्तर, योजनाओं को क्रियान्वित करे।
(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, इलाहाबाद; २४ मई, २०१८ ई०)