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चिकित्सा-कर्म से जनता का दिल जीतने में लगे हैं डॉ० रामकिशोर वर्मा

डॉ० रामकिशोर वर्मा

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’

आज जब सरकारी क्षेत्र के चिकित्सकों पर से जनता का विश्वास कम हो रहा है। सरकारी चिकित्सालयों से अमानवीय व्यवहार की ख़बरें आना आम है। चिकित्सकों द्वारा चिकित्सकीय कार्य में रुचि न लेना भी एक बड़ा कारण है। ऐसे समय में कुछ चिकित्सक ऐसे भी हैं जो जनता की सेवा फ़रिश्ता बन कर करते हैं। ये चिकित्सक आज भी चिकित्सकीय पेशे को सम्मानित बनाये रखने की लड़ाई लड़ रहे हैं और इसमें सफ़ल भी हो रहे हैं।

डॉ० रामकिशोर वर्मा के स्थानांतरण के विरोध की खबर

ऐसे ही एक चिकित्सक डॉ० रामकिशोर वर्मा है, जो लखीमपुर के पलिया में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। हरदोई जनपद के बेहंदर विकासखण्ड में आने वाले गाँव गर्राहार के निवासी डॉ० रामकिशोर वर्मा त्वचा रोग विशेषज्ञ हैं। कोविड टाइम पीरियड में डॉ० वर्मा की तैनाती/सम्बद्धीकरण प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, सम्पूर्णानगर कर दिया गया। सेवाभाव डॉ० वर्मा की रगों में भरा हुआ है। मरीज़ों की सेवा में वह रात-दिन भी नहीं देखते। उनका केवल एक लक्ष्य; रोगियों को स्वास्थ्यलाभ देने की कोशिश करना है। सम्पूर्णानगर पीएचसी परिसर विगत काफ़ी समय से चिकित्सक शून्य था। डॉ० रामकिशोर वर्मा के आने के बाद नाममात्र का सीएचसी अस्पताल लगने लगा। डॉ० वर्मा की लगन और मरीज़ों को देखने के तरीक़े ने उन्हें अल्प समय में ही जनप्रिय बना दिया। उनकी लोकप्रियता का आलम यह है कि सीएचसी पलिया में रिकॉल किये जाने के बाद सम्पूर्णानगर के वासी व अन्य नज़दीकी निवासी उन्हें वापस स्वास्थ्य केन्द्र सम्पूर्णानगर भेजने की मांग करते हुए धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।

स्थानीयजन धरना-प्रदर्शन करते हुए

इस विषय में जब डॉ० वर्मा से वार्त्ता की गयी तब उन्होंने बताया कि वह स्थानीय लोग के प्रेम से अभिभूत हैं। उन्होंने कहा कि उनकी तैनाती सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, पलिया में है और स्वास्थ्य विभाग के द्वारा उन्हें कुछ समय के लिये सम्पूर्णानगर पीएचसी सम्बद्ध किया गया था। उन्होंने कहा कि मरीज़ों का उपचार हमारी प्राथमिकता है और मैं जहाँ भी रहता हूँ हमारा प्रयास होता है कि अपने चिकित्सकीय कर्म से जनता की सेवा करता रहूँ। डॉ० रामकिशोर वर्मा के साथी और पीबीआर इण्टर कॉलेज तेरवा गौसगंज में अध्यापक व इसी कॉलेज में क्लासमेट रहे आनन्द द्विवेदी ने बताया कि डॉ० वर्मा का स्वभाव बचपन से ही ऐसा है। वह अत्यंत सहृदय व्यक्ति हैं और सदैव सामाजिक सरोकारों में योगदान को तैयार रहते हैं। डॉ० रामकिशोर वर्मा के एक और साथी कौशल कुमार (यूनानी फार्मेसिस्ट) बताते हैं कि डॉ० रामकिशोर आकस्मिक व रात में आ जाने वाले मरीज़ों को भी बड़े प्रेम से देखते हैं और मरीज़ को आराम मिले इसके लिये हर सम्भव प्रयास करते हैं। डॉ० रामकिशोर वर्मा का स्वभाव ही ऐसा है कि वह जहाँ भी रहेंगे लोग का दिल जीत ही लेंगे।