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तीन वर्ष बीतने को हैं फिर भी नहीं पूरा हो सका करोड़ों की लागत से होने वाले धोबी घाट तालाब का विकास

तालाब के निर्माण में लगभग 85 लाख रुपये का भुगतान किन्तु हक़ीक़त कुछ और

अझुवा/कौशांबी– पूर्व मे सूबे की सपा सरकार के समय 16 दिसंबर 2016 को शासन ने अझुवा के वार्ड नंबर 2 अंबेडकर नगर स्थित धोबीघाट तालाब के विकास के लिए नगरीय झील/तालाब/पोखर संरक्षण योजना के अंतर्गत 2 करोड़ 38 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत करते हुए 50 लाख रुपये नगर पंचायत अझुवा को प्रदान किए गए थे । जिस पर कार्य कराने हेतु सिराथू की एक फर्म को टेंडर प्राप्त हुआ था । लेकिन लगभग साल भर तालाब के चारों ओर मिट्टी की फिलिंग कराने और निर्माण कार्य की शुरुआत करने में ही बिता दिया गया । धीरे-धीरे कई किश्तों मे लगभग 45 लाख रुपये का भुगतान भी जिम्मेदार अभियंताओं की स्वीकृति पर ठेकेदार को कर दिया गया । उसके बाद काफी समय तक काम रुका पड़ा रहा । जबकि 6 दिसंबर 2017 को सूबे की बदल चुकी योगी सरकार में 94 लाख रुपये की अगली किश्त भी शासन ने प्रदान कर दी । फिर भी 6 महीने काम शुरू नही हो सका। काफी प्रयासों के पश्चात पिछले वर्ष गर्मी के दिनों मे पुन: तालाब का काम शुरू हुआ तो तालाब की भीतरी दीवार एवं बाउंड्री वाल के निर्माण का कार्य ठेकेदार द्वारा संपन्न कराया गया । जिसके लिए लगभग 40 लाख रुपये का भुगतान और किया गया ।

इस प्रकार अब तक लगभग 85 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है लेकिन अनुभवहीनता, घटिया गुणवत्ता एवं मानक के अनुरूप कार्य न कराए जाने के कारण बीती मई 2019 माह में निर्माण के मात्र चंद महीनों पश्चात ही तालाब की बाउंड्रीवाल का बड़ा हिस्सा और उसके कुछ दिन पश्चात तालाब की भीतरी फेंस का भी बड़ा हिस्सा ढ़ह गया । जिसमें निर्माण कार्य की निगरानी करने वाले अधिकारियों की उदासीनता और लापरवाही साफ देखी जा सकती है।

अधिशासी अधिकारी अझुवा के अनुसार ठेकेदार को कार्य को दुरुस्त कराने के लिए दो बार नोटिस भेजी जा चुकी है लेकिन वह उसे तामील नहीं कर रहा है । पुन: उसे एक बार नोटिस भेजे जाने की तैयारी की जा रही है।

ई.ओ. महोदय के अनुसार 2 करोड़ 38 लाख के कुल बजट से धोबीघाट तालाब की भीतरी फेंस का निर्माण, फेंस की मार्किंग, सीढ़ियों का निर्माण, बाहरी फेंस का निर्माण सहित उस पर चारों ओर ग्रिलिंग, गेट, चारों ओर सड़क, क्यारियों का निर्माण, बैठने के लिए सीमेंट की कुर्सियों का निर्माण आदि के साथ इसी बजट के भीतर 50 लाख रुपये की लागत से प्रकाश संबंधी कार्य कराए जाने हैं । लेकिन तालाब की मौके पर जो स्थिति है वह यही कहानी बयां कर रही है कि मोक्षधाम सहित अन्य योजनाओं का जो हश्र पूर्व में नगर पंचायत के कृपापात्रों की सरपरस्ती में हुआ उससे यह भी अछूता नहीं है।

कुल मिलाकर सरकार भले ही जनता की सुविधा के लिए विकास के नाम पर करोड़ों रुपये आवंटित करे लेकिन भ्रष्टाचार की कोढ़ सब कुछ चूसकर बैठ जाती है । जनता को विकास के नाम पर सिर्फ ठेंगा मिलता है। इस संबंध में कोई अपनी ठीक से जवाबदेही लेने को तैयार नहीं । बस सभी अपना बचाव करते दिखते हैं । ऐसे मे सबसे महत्त्वपूर्ण सवाल यह है कि आखिर कब भ्रष्टाचार की जड़ में पल रहे परजीवियों पर कार्यवाही होगी और जनता के हिस्से के विकास कार्य जनता को आंखों के सामने दिखाई देंगे, जिसका उसे उपयोग करने का अवसर मिलेगा ।

                अरविंद केसरवानी 
                 पत्रकार अझुवा