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‘ओलिम्पिक एन्साइक्लोपीडिया’ आज भी प्रासंगिक है


राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’ :

राघवेन्द्र कुमार “राघव” प्रधान संपादक, इण्डियन वॉयस 24

जैसा कि हमारे पाठकों को ध्यान होगा कि आज (२३ जुलाई) से विश्व की सबसे बड़ी खेल-प्रतियोगिता ‘ओलिम्पिक’ का समारम्भ हो चुका है। यह ओलिम्पिक चार वर्षों के अन्तराल पर होता है। इसे वर्ष २०२० में ही आयोजित होना था; परन्तु कोरोना की विभीषिका के चलते इसे स्थगित किया गया था और वातावरण अनुकूल होते ही इसका आज जापान की राजधानी टोक्यो में उद्घाटन किया गया है। इसका समापन ८ अगस्त को होगा।

ओलिम्पिक का नाम आते ही देश के प्रतिष्ठित भाषाविज्ञानी और समीक्षक आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की सम्बन्धित कृति ‘ओलिम्पिक एन्साइक्लोपीडिया’ की प्रासंगिकता जीवन्त हो उठती है। इस एन्साइक्लोपीडिया से उन समस्त तथ्यों की जानकारी प्राप्त होती है, जिसे लोग जानते तक नहीं। यही कारण है कि रहस्य-रोमांच से भरपूर यह पुस्तक पाठकों के लिए लाभप्रद है, विशेषकर प्रतियोगी विद्यार्थियों के लिए। यह पुस्तक दस अध्यायों में विभक्त है :– (१) इतिहास साक्षी है (२) आधुनिक ओलिम्पिक (३) भारत-खण्ड (४) ओलिम्पिक-खेलों का क्रमिक अध्ययन (५) खेल-विवरण (६) महान् हस्ताक्षर (७) बोलते आँकड़े (८) ओलिम्पिक : तब से अब तक (९) विन्दुश: अध्ययन (१०) ओलिम्पिक-प्रश्नोत्तरी।

प्रयागराज के लिए यह गौरव का विषय है कि ओलिम्पिक-खेलों पर हिन्दी में लिखी गयी विश्व की यह पहली ‘एन्साइक्लोपीडिया’ प्रयागनिवासी आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की देन है, जो ‘डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय’ के नाम से यूनीक़ पब्लिकेशन्स, दिल्ली से प्रकाशित हुई है। बहुरंगी पृष्ठों से सुसज्जित यह कृति उन समस्त जिज्ञासाओं को शान्त करती है, जिसके लिए पाठक-वर्ग उत्सुक रहते हैं। यह पुस्तक ईसा-पूर्व ६६७ से आरम्भ प्राचीन ओलिम्पिक से लेकर १८९६ के आधुनिक ओलिम्पिक और आगे के ओलिम्पिक-खेलों का तथ्य-आँकड़ों के साथ विस्तारपूर्वक वर्णन करती है।