कौन सुधारेगा भारत के भविष्य को ? कैसे आएंगे हालात पटरी पर ? कौन लेगा जिम्मेदारी ?

राज चौहान (ब्यूरो प्रमुख हरदोई)-


  • सरकार से लेकर शिक्षा विभाग, प्रशासन और स्वास्थ्य सेवा के हाथों भारत के भविष्य से हो रहा खिलवाड़,
  • आखिर जवाबदेही किसकी है ?
  • बिना गुरु ! भारत विश्व गुरु ।

1. आपको जान कर आश्चर्य होगा भारत के सबसे बड़े राज्य में 18 हज़ार विद्यालय तो ऐसे हैं जहां मात्र 1 टीचर है । एक टीचर कैसे पढाता होगा अलग – अलग कक्षा के विद्यार्थियों को ? कैसे पूरा होता होगा सिलेबस ?

2. सरकार 1 से पांचवी तक पढ़ने बाले बच्चों को 4 रुपये 13 पैसे प्रतिदिन के हिसाब से खाने के लिए देती है, क्या स्वच्छ भोजन छोटे बच्चों के लिए मात्र इतने रुपयों से संभव है ?

3. भारत मात्र एक ऐसा देश है जहां छोटे – छोटे बच्चे अपने भविष्य को तराशने (पढ़ने को) के लिए कब्रिस्तान में जाते हैं । इतना ही नहीं जब कोई कब्रिस्तान दफ़न होने आता है, तो छुट्टी हो जाती है । सोचिए परीक्षा निकट हो और ऐसे में छुट्टी हो जाये तो बच्चे कैसे पास होंगे  ?

4. सरकार का स्कूली शिक्षा बजट मात्र 46356 करोड़ है । यह प्राइवेट स्कूलों द्वारा किए जा रहे व्यय से कहीं अधिक कम है । आखिर शिक्षा के लिए इतना कम वजट क्यों ? क्या सरकारों का नारा मात्र भारत विश्व गुरु ?

5. बिना बुनियादी सुविधाओं वाले सरकारी स्कूलों में 11 करोड़ बच्चे जाते हैं मोटी फीस देकर 7 करोड़ बच्चे प्राइवेट स्कूलों में जाते हैं। क्या मान लें गरीबी का मतलब उच्च गुणवत्ता की शिक्षा नहीं या फिर ये मान लें कि संविधान में अंकित सबको समान शिक्षा का अधिकार का मौजूदा वक्त में कोई मतलब ही नहीं निकलता?

6. दसवीं तक पढ़ते – पढ़ते 47.4 प्रतिशत बच्चे अपनी पढ़ाई छोड़ देते हैं । वहीं इनमें से पांचवी तक 19.8, और आठवीं तक 36.8 प्रतिशत बच्चे अपनी पढ़ाई छोड़ देते है । यानी शिक्षा का हाल बुरा है । अब सरकारें जिम्मेदारी लेती नहीं तो ठीकरा फूटे तो फूटे किसके सिर ? इंतज़ार सबको है ।

7. उत्तर प्रदेश में शिक्षा का हाल ऐसा है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 24 फीसदी छात्र ही कक्षा 2 का पाठ नहीं पढ़ पाते । तो क्या मान लें कि पढ़ाई के नाम पर सिर्फ डिग्रियां बाँटना ही शिक्षा है ?

8. 17 लाख बच्चे ग़ैर पञ्जीकृत विद्यालयों में शिक्षा पा रहें हैं । तो क्या ये भी मान लें कि पढ़ाई के लिए सरकारी स्कूल ही उपलब्ध नहीं हैं । अगर हैं तो उच्च गुणवत्ता की शिक्षा नहीं सिर्फ डिग्रियां देने के लिए हैं ?

9. वहीं 553000 बच्चे तो देश छोड़कर उच्च शिक्षा के लिए विदेश चले जाते हैं । आखिर क्या है वजह ? क्यों देश छोड़ने पर मजबूर हैं बच्चे?

10 . विदेश में पढ़ने वाले एक बच्चे का औसतन ख़र्चा एक वर्ष में 216958 आता है । यानी सामान्य व्यक्ति को भेज पाना संभव नहीं । 553000 बच्चों के खर्चे का आंकड़ा लगाएं 120000000000 रुपये जो देश से शिक्षा के नाम पर बाहर चला जाता है । इसके लिए जिम्मेदारी कौन लेगा ?

11. इनमे से ज़्यादातर बच्चे लौट के नहीं आते । विश्व के अलग- 2 हिस्सों में 17835419 लोग रहते हैं । एन. आर. आई. क संख्या 13008407 है। यानी कुल 3 करोड़ से ऊपर भारतीय देश छोड़ चुके हैं। फिर भारत का भविष्य भारत के हाथों में कहां ?


प्रशासन


12. भारत मे 43 लाख 53 हज़ार बाल मजदूर हैं । ऐसे में भारत को दो जून की रोटी बच्चों के सहारे मिलती है । यानी प्रशासन भी जिम्मेदारी मुक्त ही है ?

13. हर आठवें मिनट में एक बच्चे का भारत मे अपहरण हो जाता है, जवाबदेही आखिर किसकी होगी ?

14. भारत मे हर दिन 40 बच्चों से दुष्कर्म होता है । बदलते वक्त के साथ कहना पड़ेगा आइये मौन धारण करें, क्योंकि यहां कोई भी जवाबदेही नहीं देगा ? आखिर दे भी क्यों ?

15. हर साल पढ़ाई के दबाव में 25 हज़ार बच्चे कर लेते हैं खुदकुशी । आखिर इन सबका जिम्मेदार कौन ? शिक्षक, बच्चे, अभिवावक या ग़रीबी ?

16. हर वर्ष एक लाख से ज़्यादा लापता, आखिर जाते कहाँ हैं बच्चे ? इनका क्या होता है ? क्या उंगली प्रशासन पर उठाना होगा सही ?


स्वास्थ्य


17. हर साल 12 लाख के आसपास बच्चे ऐसी बीमारियों से मर जाते हैं जिसका इलाज संभव है । जब संभव है, तो फिर इलाज़ क्यों नहीं ?

18. हर वर्ष 10 लाख बच्चे कुपोषण से मर जाते । जाहिर है जिम्मेदारी यहां भी कोई नहीं लेगा।

19. 14 वर्ष की उम्र तक पहुँचते- पहुँचते 431560 बच्चों की मौत हर वर्ष हो जाती है । स्वास्थ विभाग जिम्मेदारी क्यों नहीं लेता है, जब इलाज़ संभव है ?

20. भारत मे 736000 मौत को गले लगा लेते है । 1050000 साल भर में बच्चों की मौत, 291288 बच्चों की प्रदूषण से मौत
आखिर इन सबकी जिम्मेदारी कौन लेगा ?


कौन सुधारेगा भारत के भविष्य को ? कैसे आएंगे हालात पटरी पर ? कौन लेगा जिम्मेदारी ? सवाल बहुतेरे हैं । शिक्षा के लिए मेरी लड़ाई हमेशा जारी रहेगी ।