दीपक श्रीवास्तव (इलाहाबाद)
भाजपा द्वारा महबूबा सरकार से समर्थन वापस लेने के मायने निर्विवाद रूप से उनका भारत सरकार को आंतक विरोधी कार्यवाही में अपेक्षित सहयोग न देना तथा अपने मतों की फिक्रमंद हो एक धर्म के लोगों के प्रति अत्यधिक सहिष्णु होना । यद्यपि जम्मू कश्मीर सरकार के साथ मिलकर भारत सरकार ने आंतकवादियों का सफाया व खदेड़ने का काम बाखूबी किया है परन्तु पाकिस्तानी रणनीति का हिस्सा रहे आयातित पत्थरबाजों के हुजूम से निपटने में सेना तथा पुलिस पूर्णतः सफल रही है जिसके कारण के रूप में राज्य सरकार के उदारवादी रवैये को भी ठहराया जा सकता है, जिससे देश विरोधी शक्तियों का मनोबल बढ़ा।
आंतकवादियों द्वारा औरंगजेब की हत्या कर सेना व पुलिस को सीधा संदेश दिया कि जो स्थानीय पुलिस कर्मी या सेना का जवान आंतकियों को मारने में सहयोग देगा आंतकी उसे भी नहीं छोड़ेगे । यह भय फैलाने की वह नाकाम कोशिश है जिससे उभरना भारत सरकार के लिए अति आवश्यक है। इसी भय को समाप्त कर आम जनता का विश्वास जीतने के लिए यह आवश्यक है कि भय को भय से मारकर सरकार कोई ऐसा ऑपरेशन जम्मू कश्मीर में संचालित करे जिससे वहाँ के आतंकी व उन्हें आश्रय देने वाले पाकिस्तानपरस्त अलगाववादी सोच के स्लीपिंग मोड वाले स्थानीय दोनों को सबक मिल सके तथा भारत सरकार पाकिस्तानी अड्डे नेस्तनाबूद कर सके। आखिर कब तक हम UNO का मुंह ताकते हुए मानवाधिकार उल्लंघन के फ़रेब में फंंसकर इन आंतकियों को निरीह जनता तथा अपने सैनिकों को मारने की छूट देते रहेंगे।