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पुस्तकालयों के चरित्र को समय के अनुसार बदलने की ज़रूरत

'सर्जनपीठ' का आयोजन : शिखर से 'शून्य' की ओर सारस्वत पथ

इलाहाबाद- बौद्धिक, शैक्षिक, साहित्यिक तथा सांस्कृतिक संस्था ‘सर्जनपीठ’ की ओर से ९ नवम्बर, २०१७ ई० को नगर के ऐतिहासिक पुस्तकालय ‘भारती भवन पुस्तकालय’ के सभागार में ‘पुस्तकालय का वर्तमान’ विषय पर बौद्धिक परिसंवाद और पुस्तकालय में आनेवाले विद्यार्थियों और अन्य पाठकों के साथ संवाद किया गया।
आयोजन के अध्यक्ष भाषाविद् डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने पुस्तकालय और वाचनालय में अन्तर बताते हुए, पुस्तकों और पत्र-पत्रिकाओं की वर्तमानकालीन उपयोगिता और महत्ता पर प्रकाश डाला। डॉ० पाण्डेय ने कहा, “अब पुस्तकालयों को समय के अनुसार अपने चरित्र को बदलने की ज़रूरत है। पुस्तकालयों में अब विद्यार्थी पढ़ने के लिए आते हैं अत: उनकी आवश्यकतानुसार पुस्तकों और पत्र-पत्रिकाओं की व्यवस्था करनी होगी।”
मुख्य अतिथि के रूप में शिक्षाविद् डॉ० पूर्णिमा मालवीय ने कहा, “मैं बचपन से अब तक इस पुस्तकालय में आ रही हूँ। यहाँ अध्ययन करने के प्रति निष्ठावान् विद्यार्थियों को देखकर इनके भविष्य के प्रति आशा बढ़ने लगती है।”
विशिष्ट अतिथि और पुस्तकालयाध्यक्ष स्वतन्त्र कुमार पाण्डेय ने पाठकों और विद्यार्थियों को आश्वस्त करते हुए कहा, “हम इस पुस्तकालय को एक आदर्श पुस्तकालय के रूप में प्रतिष्ठा कर, पाठकों की आवश्यकतानुसार पुस्तकों और पत्र-पत्रिकाओं की शीघ्र व्यवस्था करेंगे।”
संचालन करते हुए प्रतिष्ठित गीतकार डॉ० प्रदीप कुमार चित्रांशी ने कहा, “आपमें से जो भी विद्यार्थी अपनी पिछली कक्षाओं की पुस्तकें बेच देते हैं, वे बेचने के स्थान पर इस पुस्तकालय को दान कर दें। इससे आपके आचरण में गुणात्मक वृद्धि होगी।”
इसके बाद पुस्तकालय में अध्ययन करनेवाले विद्यार्थियों की बारी आयी। प्रतियोगी विद्यार्थी शुभी श्रीवास्तव ने कहा, ” यहाँ पुस्तकें पाठ्यक्रम के अनुसार उपलब्ध नहीं हैं। पुस्तकालय के ठीक बाहर इतनी गन्दगी फैली हुई है कि मन पर उसका प्रभाव बना रहता है।”
ठाकुर हरहरनारायण डिग्री कॉलेज की छात्रा सोनाली गुप्ता ने बताया, “यहाँ प्रतिदिन कुछ अराजक तत्त्व भी आते हैं। प्रतियोगी पत्रिकाओं का अभाव है। प्रसाधन की भी समुचित व्यवस्था नहीं है।”
एस०एस०सी० की परीक्षाओं की तैयारी कर रही शैल्वी जायसवाल ने समस्यात्मक अन्दाज़ में बताया,” यहाँ वाहन रखने की समुचित सुविधा नहीं है। पुस्तकालय के बाहर की गन्दगी के साथ हम यहाँ अन्दर आते हैं, जिससे मन विचलित रहता है।”
टैगोर पब्लिक स्कूल के छात्र आरव शुक्ल ने कहा, “यहाँ पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं है। बाहर गन्दगी का अम्बार लगा हुआ है। प्रशासन भी मौन बना हुआ है।”
प्रतियोगी विद्यार्थी सूरज कुमार तिवारी ने कहा, “मैं वर्ष २००८ से इस पुस्तकालय में आ रहा हूँ। यहाँ से पुस्तकें भी चोरी हो जाती हैं, इसलिए कैमरा लगाना ज़रूरी हो गया है। एन०सी०आर०टी० की पुस्तकें मँगानी होंगी।”
इलाहाबाद केन्द्रीय विश्वविद्यालय की छात्रा ऋतिका गुप्ता ने प्रतियोगी पुस्तकों और पत्रिकाओं की उपलब्धता पर बल दिया। एकदिवसीय परीक्षाओं की तैयारी में लगे फ़हीम अहमद ने वाहन रखने की सुविधा और परीक्षाओं के पाठ्यक्रम के अनुरूप पुस्तकों को उपलब्ध कराने के लिए कहा। अफ़ाक अली ने उर्दू-पुस्तकों के अभाव के प्रति चिन्ता व्यक्त की।