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साहित्य संगम संस्थान ने मातृदिवस पर किया ऑनलाइन कवि सम्मेलन

राजेश पुरोहित (भवानीमंडी)-

दिल्ली:- साहित्य संगम संस्थान दिल्ली के गीतशाला मंच पर रविवार को मात् दिवस पर एक आनलाइन काव्यगीत प्रतियोगिता का आयोजन किया जिसके प्रथम चरण मे प्रदेश भर से 30साहित्यकारो ने भाग लेकर कार्यक्रम मे चारचांद लगा दिया।

मीडिया प्रभारी सरोज सिंह राजपूत ठाकुर ने बताया कि सबने बहुत ही शानदार मां पर अपनी रचनाओं की प्रस्तुति दी कार्यक्रम की मुख्य अतिथि हमारे संस्थान की जबलपुर की वरिष्ठ साहित्यकारा डा०मीनाभटृ दीदी जी रही कार्यक्रम के अध्यक्ष साहित्य संगम संस्थान के अध्यक्ष आ०राजवीर सिंह जी को बनाया गया और कार्यक्रम मे हमारे दो वरिष्ठ अतिथीगण और निर्णयाक गण संगम सुवास नारी मंच की अध्यक्षिका आ०छायाप्रभु सक्सेना जी और हमार संस्थान के प्रदेश मीडिया प्रभारी आ०भाई राजेश पुरोहित जी को बनाया गया।कार्यक्रम मे सरस्वती वंदना योगशाला मंच की अध्यक्षिका आ०इंन्दू शर्मा शचि के जी स्वर मे प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम का शानदार संचालन गीतशाला मंच की अध्यक्षा आ०सरोज सिंह राजपूत ठाकुर द्वारा किया गया।कार्यक्रम का समापन हमारे सभी मंचस्थ अतिथियों के उद्बोधन से हुआ।

भवानीमंडी के रचनाकारों ने मातृदिवस पर ऑनलाइन कवि सम्मेलन का किया आयोजन

भवानीमंडी:- अखिल भारतीय साहित्य परिषद इकाई भवानीमंडी द्वारा मातृदिवस पर ऑनलाइन कवि सम्मेलन का आयोजन किया जिसमें भवानीमंडी सुनेल के रचनाकारों ने ऑनलाइन का काव्यपाठ किया।

ऑनलाइन कवि सम्मेलन का शुभारंभ रविवार को रात 9 बजे किया। इससे पूर्व माँ शारदे का पूजन अर्चन किया। मां सरस्वती की वंदना बाल कवयित्री शुभांगी शर्मा ने प्रस्तुत की। कवि सम्मेलन के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्तर के कवि प्रमोद जैन पिन्टू रहे। विशिष्ट अतिथि महावीर प्रसाद जैन देशभक्ति कविताओं के रचयिता, तथा राजेन्द्र आचार्य राजन वीर रस के कवि रहे ।

कवि सम्मेलन में डॉ. अनिल गुप्ता ने सृष्टि का प्रारम्भ माँ ही है ये जीवन कुछ भी तो नहीं मां के बिना रचना प्रस्तुत की। दर्शन सिंह होरा ने “आंख खुले तो चेहरा मेरी माँ का हो,आँख बंद हो तो सपना मेरी माँ का हो सुनाई । डॉ. राजेश कुमार शर्मा पुरोहित ने “माँ के आंचल से प्रेम की वृष्टि है,माँ से ही मिलती सबको दृष्टि है।” राजेन्द्र आचार्य राजन ने माता तेरे चरणों मे शीश हम झुकाते हैं गीत की सुंदर प्रस्तुति दी। शायर रज्जाक मंसूरी ने “मैं दुश्मनों के दरमियाँ भी महफूज निकल आया ,माँ की दुआओं में असर होता है। कवि हिमांशु चतुर्वेदी की रचना माँ प्रेम है तपस्या है त्याग है माँ सुनाई। गजलकार रामप्रीत आनंद ने “जीवन का आधार है माता, बच्चों का आकार है माता। महावीर प्रसाद जैन ने “प्रथम गुरु बन संस्कारित कर जीने का अधिकार दिया रचना प्रस्तुत की। मोहम्मद सगीर सागर ने “एक दो दिन से तो माँ बहुत याद आ रही है। संजय श्रीमाल ने “जिसका कोई मोल नहीं किसी तराजू तोल नहीं, माँ जैसा इस दुनिया मे शब्द कोई अनमोल नहीं प्रस्तुत की। गीतकार राकेश थावरिया ने तू कितनी अच्छी है कितनी प्यारी है माँ गीत की शानदार प्रस्तुति दी। सुनेल की कवयित्री आशा रानी जैन आशु ने “माँ तेरे कदमों में है, मैंने जन्नत पाई काव्य रचना सुनाई। प्रमोद जैन पिन्टू ने “माँ हर वेदना में संवेदना बन कर रही है रचना प्रस्तुत की ।

रात 9 बजे से 11 बजे तक ऑनलाइन काव्यपाठ के दौरान कवियों ने मातृदिवस पर आडियो के माध्यम से शानदार रचना पाठ किया। परिषद के कवि भँवर सिंह कुशवाह बालाजी टाइम्स के संपादक व जगदीश सोनी ने भी उपस्थिति दर्ज कराई। कवियों का उत्साहवर्धन किया। ऑनलाइन कवि सम्मेलन का शानदार संचालन देश के सुप्रसिद्ध कवि डॉ. राजेश कुमार शर्मा पुरोहित ने किया और उन्होंने सभी का आभार व्यक्त किया।