गीत : प्रिय न जाओ अभी चांदनी रात है

आदित्य त्रिपाठी “यादवेन्द्र”-

आदित्य त्रिपाठी – प्रबन्ध सम्पादक —-indianvoice24.com—-

नैन की नैन से हो रही बात है ।

प्रिय न जाओ अभी चांदनी रात है ॥

बावरी हूँ विरह में तुम्हारे पिया ।

आपके प्यार की मैं दुखारी पिया ।

आस हो तुम हमारी हो विश्वास तुम ।

मेरे जीवन की कन्ते हर इक सांस तुम ।

तेरे हाथों अब तो मेरा हाथ है ।

प्रिय न जाओ अभी चांदनी रात है ॥

प्राणप्रिय मैं तुम्हारी हूँ अर्धांगिनी ।

आधे तन की तुम्हारे हूँ मैं स्वामिनी ।

इसलिए रोकती हूँ न जाओ प्रिये ।

वल्लभे तुम मुझे क्यों हो व्याकुल किये ।

हुआ अब विरह तप्त ये गात है ।

प्रिय न जाओ अभी चांदनी रात है ॥

देखकर ही तुम्हे सांस चलती मेरी ।

तुम न जाओ अभी ये है विनती मेरी ।

रोते रहते नयन आपकी चाह में ।

मैंने बरसों बिताए सजन राह में ।

आप के बिन न भाता मुझे प्रात है ।

प्रिय न जाओ अभी चांदनी रात है ॥

होते हम तुम तो होता ये मौसम नहीं ।

होता मौसम तो होते हैं हम तुम नहीं ।

आज हम तुम भी हैं और मौसम भी है

मस्त बारिश की बूदों की छम-छम भी है ।

तेरी खातिर ही मेरा ये श्रृंगार है ।

प्रिय न जाओ अभी चांदनी रात है ॥

                 

 

(आदित्य त्रिपाठी, ग्राम व पोस्ट बालामऊ, जनपद हरदोई, उ. प्र.)