कविता : दुःख का अहसास बड़ा सुख से

मीतू मिश्रा, हरदोई –


दुःख का अहसास
बड़ा सुख से
सुख में भी संग संग
बहता है।
सुख पल भर ही
हम जीते हैं
जीवन भर
दुःख को ढोते हैं
आंखें हम दम बह
उठती हैं
सुख हो या दुःख
के पलछिन हों
सुख दुःख
जीवन के अमिट रूप
फिर क्यों घबराना
दुःखों से
खुशियों पे क्यूं अभिमान करें
जो आज हमारे संग चले
कल जा बैठेगा गैरों में
चलते फिरते अहसासों में
जीवन का अर्थ नही खोते
हर पल समभाव संग तौलो
आत्मा की उन्नति करता चल।