कोथावाँ प्रा०वि० का हाल, बच्चों को दूध और फल नहीं दे रहे जिम्मेदार

रंगे सियारों से सारी उम्मीदें बेमानी हैं

दिल्ली भोग भोगती है... जो कल मरता है आज मरे...

प्रधान संपादक, इण्डियन वॉयस 24

राघवेन्द्र कुमार “राघव”


राजनीति के रंगे सियारों से
सारी उम्मीदें बेमानी हैं,

सत्ता लोलुपता के कारण
मर गया आँख का पानी है ।

भीतर विद्रोही मार रहे
बाहर आतंकी काट रहे,

लेकिन हम हैं बेशर्म बड़े
राजनीति ही हाँक रहे ।

सरकार बने चाहें
सारा आलम जलकर खाक बने,

दिल्ली भोग भोगती है
जो कल मरता है आज मरे ।

ग्यारह छब्बीस और तीन चार
कब तक जान गवाँएंगे,

क्या सिर्फ सियासतगाहों में
हम बैठे गाल बजाएंगे ।

एक सर्जिकल स्ट्राइक का
कब तक हम गुणगान करें,

भारत अब नहीं चाहता है
प्यारे उसके वीर जवान मरें ।

छप्पन इंची सीने की
कब तक धौंस दिखाएंगे,

राजनीति से ऊपर उठ
क्या फिर से कुछ कर पाएंगे ?