भ्रष्टाचार का मामला : जी०एस०आर०एम०एम०पी०जी० कॉलेज, लखनऊ में छात्रों से हो रही अवैध वसूली

कुचल डालो! इस सियासी चाल को अब

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

आदमीयत का यह रोना हो गया है,
देश का किरदार बौना हो गया है।
हासिल क्या उन्हें हस्पताल-पार्क से,
‘ब्यूटी पार्लर’ कोना-कोना हो गया है।
शेर-मानिन्द देश जो गरजता था,
अब वह जयचन्दों का छौना हो गया है।
‘वेण्टिलेटर’ पर है दिखती रहबरी,
इस सियासत को ‘कोरोना’ हो गया है।
खेल मत लाचारी से! इस अवाम की,
हर तरफ़ अब रोना-धोना हो गया है।
वफ़ादारी का सिला तो मर रहा है,
दूध का जलता भगोना हो गया है।
ज़ुम्हूरियत मिल कच्चे हैं सब खा रहे,
बोझ मज़्बूरी का ढोना हो गया है।
अय्याशी में जी रहे कुछ ज़िन्दगी,
रूप देखो! क्या सलोना हो गया है!
कुचल डालो! इस सियासी चाल को अब
बीज जो ज़ह्र का बोना हो गया है।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १३ जून, २०२१ ईसवी।)

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