कविता– मकर-संक्रान्ति

मकरसंक्रांति का दिन
है आया ,
पूरा भारत है हर्षाया।
शीत ऋतु अब जाने को है,
कुछ ऐसा सन्देशा लाया।

गंगा का अवतरण दिवस है,
सगरपुत्रों का तरण दिवस है।
गंगा सागर अवगाहन का,
एक मात्र यह पुण्य दिन आया।

मकरसंक्रान्ति का पर्व है आया
भारत पूरा है हर्षाया।

सूर्य मकर राशि पर आया,
तेज से देखो वो गरमाया।
उत्तरायण की दिशा हुई है,
भीष्मपितामह-मुक्ति-दिन आया।

मकरसंक्रान्ति का पर्व है आया।,
भारत पूरा है हर्षाया।

पतंग उड़ रही सर-सर देखो,
लूट रहे सब सरपट देखो।
पतंग महोत्सव का दिन आया।
तिल व गुड़ सबके मनभाया

मकरसंक्रान्ति का दिन है आया,
भारत पूरा है हर्षाया।

खिचड़ी सब लोगों ने खाया,
आज इसी का दान कराया।
कम्बल कपड़े दान दे रहे ,
पुण्य दान का दिन है आया।

मकरसंक्रान्ति का दिन है आया।
भारत पूरा है हर्षाया।

कल्पवास का शुभदिन आया।
संगम तट पर ध्यान लगाया।
माघ मेला शुभारम्भ हो गया
ये सन्देशा भी ले आया।

मकरसंक्रान्ति का पर्व है आया,
पूरा भारत है हर्षाया।

किरन शुक्ला????????