डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय के कुछ शेर

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय-


एक : उसका दीवानापन, सितमकशीद१ लगता है,
सितमगर सितमकशी२ का ऐसा इम्तिहान न ले।
दो : मझधार में है सफ़ीना३, साहिल४ है दिखती दूर,
किश्तीबान५ साहिबे! रुको नहीं, मंज़िल भले हो दूर।
तीन : बाग़े हयात में वह फूल चुनने आया है,
डर है, दामन ख़ार-ज़ार में उलझा न बैठे।
चार : तू आग-फूस का गोला, बनाकर तो देख,
चिनगारी उनकी आँखों से, निकल आयेगी।
पाँच : तू नदी के साथ एक बार, बहकर तो देख,
उसकी आँखों की रवानी, तुझमें समा जायेगी।


शब्दार्थ : १- अत्याचार सहा हुआ २- अत्याचार सहना ३- नौका ४- किनारा ५- नाविक


(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, इलाहाबाद; १४ जनवरी, २०१८ ई०)
यायावर भाषक-संख्या : ९९१९०२३८७०