प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी की एक और नौटंकी शुरू

पृथ्वीनाथ पाण्डेय

नरेन्द्र मोदी ने कल (२ मार्च) रात्रि में ट्वीट किया था– मैं ‘सोसल मीडिया’ प्लेटफॉर्म छोड़ रहा हूँ, फिर आज दोपहर में लगभग १६ घण्टे-बाद ट्वीट किया है– एक दिन के लिए ‘सोसल मीडिया’ छोड़ूँगा; और वह भी ८ मार्च (अन्तरराष्ट्रीय महिला-दिवस) के अवसर पर। इतना ही नहीं, मोदी एक दिन के लिए महिलाओं की जागरूकता के प्रति समर्पित किसी महिला को अपना ‘एकाऊण्ट’ सौंपेंगे। उल्लेखनीय है कि ५ करोड़ ३३ लाख ट्वीटर और इन्स्ट्राग्राम पर ३ करोड़ ५२ लाख मोदी के अनुयायी हैं।

निस्सन्देह, यह एक अच्छी बात मानी जा सकती है; परन्तु मूल प्रश्न है, नरेन्द्र मोदी किस महिला अथवा महिलाओं के किसी समूह को अपना ‘गूगल एकाऊण्ट’ सौंपेंगे, जिससे कि वह मुक्त रूप से ‘अपने मन की बात’ सार्वजनिक कर पाये? ऐसे में, नरेन्द्र मोदी को चाहिए कि वे अपना एकदिवसीय ‘एकाऊण्ट’ उस निर्भया के माँ को दे दें, जिसकी बेटी के साथ अमानवीय कृत्य करनेवाले अभी तक क़ानून के दाव-पेच से बचते आ रहे हैं। उनके इस निर्णय का देश एक स्वर में स्वागत भी करेगा। बहरहाल, जिस किसी को भी मोदी का ‘एकाऊण्ट’ सौंपा जायेगा, वह मोदी से ही प्रभावित दिखेगी। इसके साथ ही इससे बिलकुल इंकार नहीं किया जा सकता कि नरेन्द्र मोदी उसी महिला को अपना ‘एकाऊण्ट’ एक दिन के लिए सौंपेंगे, जो उनके ही शब्दों का उपयोग कर सार्वजनिक करेगी, अर्थात् एक तोते का चरित्र जीनेवाली महिला ही नरेन्द्र मोदी का ‘एकाऊण्ट’ सँभालेगी और इस पर हमारा ‘मुक्त मीडिया’ अपना मुहर लगाता है। ‘अन्तरराष्ट्रीय महिला-दिवस’ के अवसर पर नरेन्द्र मोदी की यह सोची-समझी चाल है, जिसका मोदी के लिए कोई ‘हासिल’ नहीं होगा।

वास्तविकता से मुँह चुराने की यह एक प्रकार की छद्म और प्रवंचनापूर्ण रणनीति लगती है, जिसे समझा जा सकता है। इसका ज्वलन्त उदाहरण शाहीनबाग़ में हासिल नाकामी, मोदी का पीछा करता ‘दिल्ली-दंगा’ तथा ‘कोरोना विषाणु’ के सच को छुपाने के लिए उन्होंने एक चाल चली है, जिस पर न्यायालय ने चार सप्ताह के भीतर केन्द्र-सरकार और केन्द्र-सरकार के अधीन ‘दिल्ली-पुलिस’ से स्पष्टीकरण माँगे हैं।

मैंने इस विषय पर एक गम्भीर और समय-सत्य अध्ययन कर यह निष्कर्ष निकाला है कि देश में जो सामाजिक उथल-पुथल दिख रहा है, उससे घबराकर अपनी लोकप्रियता की परख करने के लिए एक ‘खेला’ खेला है।

मोदी ने ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का नारा देकर क्या किया है? देश ने सच समझ लिया। आज महिलाओं के स्वास्थ्य और शिक्षा की कौन-सी सहज सुविधा दी गयी है? देश में प्रति ३० मिनट पर एक भारतीय नारी बलात्कार का दंश झेलती है। इसके लिए नरेन्द्र मोदी ने क्या किया है?

(सर्वाधिकार सुरक्षित : पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ३ मार्च, २०२० ईसवी)