कोथावाँ प्रा०वि० का हाल, बच्चों को दूध और फल नहीं दे रहे जिम्मेदार

पुलिस और एआरटीओ की कार्यवाही से स्कूल बस संचालकों में मच गया हड़कम्प

नौनिहालों का भविष्य संवारने की जिन स्कूलों पर ज़िम्मेदारी है, वो सालों से बच्चों की ज़िन्दगी से खेलते रहे। सर्वोच्च न्यायालय का स्पष्ट निर्देश है कि 15 बरस की अवधि पूरी करने वाली बसों को स्कूलों में नहीं चलाया जा सकता। उच्चतम न्यायालय की रूलिंग को किस तरह धता बताई जा रही है, इसका खुलासा सीओ सिटी अजीत सिंह चौहान और एआरटीओ (प्रवर्तन) एसएस मिश्रा की कल सेण्ट जेम्स स्कूल की बसों की जांच में हुआ। 04 बसों पर एक ही पंजीयन नम्बर मिला। पड़ताल में सामने आया कि 06 साल पुराने वाहन के पंजीयन नम्बर पर 30 से 35 साल पुरानी कबाड़ा बसों में बच्चे को ढोया जा रहा था। कई बसों का चेसिस नम्बर भी बदले मिले। नतीजतन 21 बसों का चालान हुआ, 06 बसें पुलिस लाइन में खड़ी करा दी गईं और 02 संचालकों पर मुक़दमा दर्ज कराया गया।

पुलिस और एआरटीओ की कार्यवाही से स्कूल बस संचालकों में हड़कम्प मच गया। आज सुबह पैरेन्ट्स बच्चों को छोड़ने उन प्वाइंट्स पर पहुंचे, जहां से बसें बच्चों को पिक करती हैं तो हैरान रह गए। काफी देर इंतज़ार के बाद भी बसें नहीं पहुंचीं। पैरेन्ट्स के पता करने पर मालूम हुआ कि बस संचालकों ने हड़ताल कर दी है। इसके बाद पैरेन्ट्स बच्चों संग डीएम के आवास पहुंच गए। हालांकि, डीएम विवेक वार्ष्णेय के तबादले के चलते पैरेन्ट्स की उनसे भेंट नहीं हो सकी। इसके बाद अभिभावक संघ के प्रतिनिधि मण्डल ने अपर जिलाधिकारी डॉ0 विपिन मिश्रा, सिटी मजिस्ट्रेट मृत्युंजय राम और सीओ सिटी अजीत सिंह चौहान से भेंट कर उत्पन्न समस्या से अवगत कराया।

अभिभावक संघ ने मांग की कि या तो बसों की तात्कालिक व्यवस्था करें या फिर अवकाश घोषित करें। कहा कि बसों की फीस अभिभावक भर चुका है तो ये स्ट्राइक जायज़ कैसे है ? अफसरों ने दो-टूक कहा कि बस संचालकों की स्ट्राइक अवैध है, क्योंकि वे पकडे गए हैं, तो वे अपराधी हुए न कि स्ट्राइक पर जाने वाले लोग। बताया कि आज अन्य स्कूल में भी जांच चल रही है। प्रशासनिक अफसरों ने बताया कि बस संचालकों की स्ट्राइक पर स्कूल प्रबंधन को नोटिस भेजी जा रही है। इसके बाद संघ के लोगों ने सेण्ट जेम्स के प्रिंसिपल से मुलाक़ात की। प्रिंसिपल ने बताया कि बस संचालकों ने कल बसें चलाने का आश्वासन दिया है और जैसा भी होगा पैरेन्ट्स को एसएमएस से अवगत कराया जाएगा।

कल के घटनाक्रम के बाद सेण्ट जेम्स ने परसों होने वाली पैरेन्ट्स मीटिंग रद कर दी है। अब यह बैठक जुलाई में होगी। दरअसल स्कूल प्रशासन को आशंका रही होगी कि पैरेन्ट्स मीटिंग में तीखे सवालों का सामना करना पड़ सकता है। लिहाज़ा, मीटिंग जुलाई तक टाल दी गई। प्रशासन, पुलिस के अफसरों और सेण्ट जेम्स के प्रिंसिपल फादर एलियास कॉडोज़ा से मिलने वालों में संघ संरक्षक राकेश पांडेय, आमिर किरमानी, शिव प्रकाश त्रिवेदी, अध्यक्ष गोपाल द्विवेदी, महासचिव दानिश किरमानी, उपाध्यक्ष कुलदीप द्विवेदी, आनंद गुप्ता और अमिताभ शुक्ला शामिल रहे।

भाजयुमो ने की स्कूल बस संचालकों पर कड़ी कार्यवाही की मांग


भारतीय जनता युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष ठाकुर सन्दीप सिंह ने प्रतिनिधिमंडल के साथ एडीएम डॉ0 विपिन मिश्रा से मुलाक़ात की। उन्होंने कहा कि स्कूल बस संचालकों के हड़ताल पर जाने के चलते बसें संचालित होने तक स्कूलों में अवकाश घोषित कर शुल्क वापस कराया जाए। जो भी शुल्क वापस नहीं करे, उस पर गबन के आरोप में कार्यवाही हो। मोर्चा जिलाध्यक्ष ने कहा कि एक ही पंजीयन पर चार बसें संचालित करना गम्भीर विषय है। इससे साफ़ है कि स्कूल प्रबन्धन और ट्रांसपोर्टर मिलीभगत से फर्जीवाड़ा कर बच्चों की ज़िन्दगी ख़तरे में डालते रहे। मोर्चा जिलाध्यक्ष ने इन पर कठोर कार्यवाही के साथ प्राइवेट वाहनों की जांच कराने की मांग की।

प्रतिनिधि मण्डल में भाजपा जिला उपाध्यक्ष अजीत सिंह बब्बन, मीडिया सम्पर्क प्रमुख प्रीतेश दीक्षित, मोर्चा उपाध्यक्ष गीत सिंह, महामन्त्री अर्जुन सिंह, आशीष सिंह पारुल और अमित अवस्थी आदि शामिल रहे।

अधिवक्ता संघ ने लिखा डीएम को पत्र


अधिवक्ता संघ अध्यक्ष विजय प्रताप द्विवेदी और महामन्त्री परम प्रकाश अग्निहोत्री ने डीएम को लिखे पत्र में स्कूल बस संचालकों की हड़ताल को अभिभावकों पर दबाव बनाने की क़वायद बताया। संघ ने बसों की जांच में गड़बड़झाले के खुलासे को गम्भीर बताते हुए कठोर कार्यवाही अमल में लाने की मांग की है।

-अंतर्ध्वनि एन इनर वॉइस ब्यूरो