ब्राह्मण, जाति और समाज
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– मानव समाज की एक जटिल सच्चाई यह है कि संसार का कोई भी देश, कोई भी संस्कृति, कोई भी मत या सम्प्रदाय ऐसा नहीं है जहाँ किसी न किसी रूप में […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– मानव समाज की एक जटिल सच्चाई यह है कि संसार का कोई भी देश, कोई भी संस्कृति, कोई भी मत या सम्प्रदाय ऐसा नहीं है जहाँ किसी न किसी रूप में […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– सबसे पहले ब्राह्मण को पुनर्मूल्यांकन की आवश्यकता है। यह कथन किसी वर्गविशेष के अपमान या सामाजिक विद्वेष से प्रेरित नहीं, अपितु धर्म-संरक्षण और सामाजिक सुचिता की गम्भीर चेतावनी है। जिस प्रकार […]