भारत की तस्वीर : बाबा और पोते का जीवन्त प्रेम
हम लोग जिस पीढ़ी के हैं उसमें पिता के सामने तमाम मजबूरियां रहती थी । वह चाहते हुए भी अपने बेटे को सबके सामने दुलार नहीं सकता था, प्यार नहीं कर सकता था। पूरे परिवार, […]
हम लोग जिस पीढ़ी के हैं उसमें पिता के सामने तमाम मजबूरियां रहती थी । वह चाहते हुए भी अपने बेटे को सबके सामने दुलार नहीं सकता था, प्यार नहीं कर सकता था। पूरे परिवार, […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• १५ जनवरी का प्रयागराजतीर्थ-दर्शन और महाकुम्भ मनोरम रहा। उत्तरप्रदेश-पर्यटन-विभाग एवं उत्तरप्रदेश संग्रहालय निदेशालय की ओर से आयोजित कला, संस्कृति-इतिहास-पुरातत्त्व एवं पाण्डुलिपि-विषयक प्रदर्शनी अत्युपयोगी रही है; दुर्लभ एवं प्रामाणिक सामग्री सुव्यवस्थित […]
आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय(वैयाकरण एवं भाषाविज्ञानी), प्रयागराज। हम जैसाकि जानते हैँ– तीर्थोँ का राजा प्रयाग कहलाता है, जिसके सहयोगी तीर्थ हैँ :– उज्जैन, हरिद्वार तथा नासिक, जहाँ कुम्भपर्व का आयोजन होता है।अब प्रश्न है, वास्तव […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय(वैयाकरण एवं भाषाविज्ञानी), प्रयागराज।•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• संक्रान्ति का अर्थ है, ‘एक स्थान से दूजे स्थान मे पहुँचना वा एक-दूसरे का मिलना ‘संक्रान्ति’ कहलाती है। ‘संक्रान्ति’ की व्युत्पत्ति पर विचार करेँ तो ज्ञात होता […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय(वैयाकरण एवं भाषाविज्ञानी), प्रयागराज।•••••••••••••••••••••••••••••••••••••• इन दिनो प्रयागराज मे एक ऐसा उत्साह है; उमंग है तथा चहल-पहल है, जो अनिर्वचनीय है। जिज्ञासा, कुतूहल एवं उत्सुकता बाँधे नहीँ बँधती। एक प्रकार से आस्था […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय(वैयाकरण एवं भाषाविज्ञानी), प्रयागराज। तीर्थोँ का राजा प्रयागराज पलक-पाँवड़े बिछाये, देश-देशान्तर से आस्था, श्रद्धा, विश्वास एवं भक्ति का भाव लेकर आनेवाले समस्त तीर्थयात्रियोँ के स्वागत मे प्रतीक्षारत है। यह वही प्रयाग […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• देश को स्वतन्त्रता प्राप्त होने के पश्चात् ‘मीडिया-जगत्’ मे ऐसा पहली बार हो रहा है कि किसी राजनैतिक दल की सरकार ने अपनी ओर से यह मार्गदर्शिका निर्धारित कर दी […]
इलाहाबाद में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती नदियों के संगम पर माघ और फाल्गुन (जनवरी एवं फरवरी) माह में छह वर्ष के अंतराल पर आयोजित मेले को कुंभ और बारह वर्ष के अंतराल पर आयोजित […]