भ्रष्टाचार का मामला : जी०एस०आर०एम०एम०पी०जी० कॉलेज, लखनऊ में छात्रों से हो रही अवैध वसूली

सत्य, निष्ठा और न्याय मेरा गाँव मेरा देश

July 31, 2021 0

उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद जी की जयंती (31 जुलाई, 1880 लमही, काशी) सत्य, निष्ठा और न्याय के पथ पर,मैं जीवन भर चलती जाऊँ।सादा जीवन हो उच्च विचार,मैं महापुरुषों से ऐसी सीख लाऊँ। आदर्श यथार्थ भरी […]

अभिजीत मिश्र की कविताएँ

July 30, 2021 0

1. वसुधा पर मानव कुछ सीखा है हमने जग में, वसुधा के इस आँचल सेपौरुष की गाथा को सुनता आजीवन मानव व्याकुल मन से। सुरसरि के अविरल प्रवाह को बाँध दिया तब शंभू नेस्थान जटा […]

कविता : कुछ इस तरह…

July 30, 2021 0

हम बिखरेंगेकुछ इस तरहकि तुम संभाल भी न पाओगे।हम टूटेंगेकुछ इस तरहतुम जोड़ भी न पाओगे।हम लिखेंगेकुछ इस तरहकि तुम समझ भी न पाओगे।हम सुनाएंगे दास्तांकुछ इस तरहकि तुम कुछ कह कर भीन कह पाओगे।हम […]

डॉ० सपना दलवी की कविता— माँ

July 29, 2021 0

माँ के आँचल में जो सुकून है वो सुकून कहीं और कहाँ? सुना था मैंने, उसने सुनी जब मेरी पहली किलकारी तो आँखें उसकी नम सी हुई थीं पाकर मुझे अपनी गोद में उसने तो […]

बँटवारे का दंश!

July 29, 2021 0

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय विश्वास की डोर थामेसरक रहा थालक्ष्य की ओर—तन-मन मेंआशंकाओं की झंझावात समेटेडोर की मध्य-बिन्दु के स्पर्श की अनुभूतिबाहर से भीतर तकसिहरन भरती जा रही थी।अचानक…. सहसा!विश्वास की कुटिल चालेंचलायमान हो उठीं।विस्फारित […]

तस्मै श्री गुरुवे नमः, अब अतीत की बात

July 24, 2021 0

कोई मूरख कह हँसे, कोई कहे घसियारा ।हाय मास्टरी ने किया, जीवन को दुखियारा ।। गन्दा प्रांगण जो मिले, अफसर होयें क्रुद्ध ।मरता क्या करता नहीं, जीविका हो अवरुद्ध ।। ‘तस्मै श्री गुरुवे नमः ‘ […]

वक़्त को छेड़ना नादानी है

July 22, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय शाम ढली दीये को जलने दो,नींद में सपनों को पलने दो।बढ़ती है प्यास तो बढ़ जायेबर्फ़ को पानी में गलने दो।दम तोड़ ले ख़्वाहिश कहीं,आदत है, नींद में चलने दो।सरे-बाज़ार […]

हे प्रकृति! अब करो उद्धार

July 22, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय समय आया, कर विचार।देश की जनता है लाचार।समय-बाण से बेधो इतना,राजनीति बदले आचार।खद्दर शर्म से पानी-पानी,नहीं कहीं सुख का आधार।महँगाई से त्रस्त है जनता,सरकारें धरती पर भार।नेताओं से त्रस्त है […]

विषय विसंगति से भरा, मन लेता है भेद

July 20, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–मायावी संसार में, भाँति-भाँति के लोग।पाप-घड़ा है भर रहा, यहीं करोगे भोग।।दो–जीवन रस की गागरी, कर लो छककर पान।भाव-समादर है यहीं, मिलता भी अपमान।।तीन–यहाँ-वहाँ के भेद से, मन में होता […]

घायल होती मुसकान

July 17, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय भूख से बिलबिलाती आँतेंचीथड़ों में लिपटी-चिपटी-सिमटीअपनी पथराई आँखें पालतीटुकुर-टुकुर ताकतीआँखों से झपटने की तैयारी करतीमेले-झमेले की गवाह बनती।आस-विश्वास की फटही झोली लियेतमन्नाओं-अर्मानों की लाश ढोतीफफोलों से सजी हथेलियों कीरेखागणित पढ़तेहोठों […]

कुछ शे’र सुनाता हूँ, जो मुझसे मुख़ातिब हैं

July 17, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–तुम बहार बनकर छाते रहो,ख़ुद को पतझर मुबारक करता हूँ।दो–ले गये सब यहाँ से रजनीगन्धा,मेरे हक़ में नागफनी छोड़ आये हैं।तीन–आँखों में आँखें डाल बातें सीखो,मुखौटा हटाओ तो कोई बात […]

मस्ती में इठलाता झरना

July 10, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय कितना प्यारा लगता झरना,पर्वत से जब झरता झरना!कलकल-छलछल गीत सुनाकर,सबका मन है हरता झरना।उठता-गिरता, गिरता-उठता,कष्ट है कितना सहता झरना!आज गिरा है कल तो उठेगा,ठोकर खाकर बढ़ता झरना।कष्टों से है क्या […]

मनहर ताल लगाये आम

July 10, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय फल-राजा कहलाता आम, मीठा और रसीला आम।दिखते माह जुलाई में हैं, डाल-डाल गदराये आम।लँगड़ा, चौसा और दशहरी, सिन्दूरी, मलदहिया आम।तरह-तरह के नाम हैं उसके, फजली, चम्पा, देसी आम।कहीं है हापुस, […]

आवर्त्तन-दरार

July 3, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–महकी अमराईचहका यौवनआग लगी पानी में!दो–आँखों-की खटासकोई आस-न-पासरिश्ते मुसकरा उठे।तीन–काग़ज़ की नावबारिश की छाँवसूरज सघन चिकित्साकक्ष में।चार–वर्तनी अकेलीसौन्दर्य-बोध लजीलाअभिव्यक्ति दरकने लगी।पाँच–प्रतीक सजीलाबिम्ब रंगीलाअभिव्यक्ति बहक पड़ी।(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, […]

अभिव्यक्ति के दंश

July 2, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय (एक)भाषा बनावटीशैली मिलावटीप्रस्तुति हस्पताल में।(दो)भाषा बदरंगशैली मलंगप्रस्तुति मधुशाला में।(तीन)कथ्य निहत्थातथ्य बेसुरे“हँसुए के ब्याह में खुरपे का गीत”।(चार)भयंकर आँधी-तूफ़ानकहीं कोई अप्रिय घटना नहींअसहयोग आन्दोलन है।पाँचबित्ताभर ज़मीन नहींनाम ‘पृथ्वीनाथ’घोटाला-ही-घोटाला! (सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य […]

अपनी ‘जन्मतिथि’ के अवसर पर स्वयंं को समर्पित पंक्तियाँ

July 1, 2021 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आज कैलेण्डर में टँकी तिथिएक जुलाई,आँखों-में-आँखें डालतीन सौ पैंसठ दिनों की दैनन्दिनी उघारे,सिद्धहस्त ज्योतिषी-सदृश अतीत-वाचन कर रही है।आषाढ़-मास के उमड़ते-घुमड़ते बादल देख,कवि-कलाधर, कवि-कुसुमाकर, कवि-चूड़ामणिकवि-सम्राट कालिदास का‘मेघदूत’ जीवन्त हो उठता है।पावस-ऋतु […]

एक अभिव्यक्ति

June 30, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय यक़ीं नहीं आताख़ुद को देख रहा हूँ।अतीत, वर्तमान तथा भविष्य के गलियारों मेंढूँढ़ रहा हूँअपने न होकर भी हो जाने के साक्ष्य कोपर हर बारख़ुद को ख़ुद सेठगा हुआ पा […]

कविता : राजेश पुरोहित विरचित दोहे

June 25, 2021 0

बहते आँसू आँख से, जाने न कोई पीर।जाने वो समझे नहीं, समझे जो गम्भीर।। आँसू टपके नैन से,बहने लगी है धार।पिया मिलन की आस मे,चोट खाई हज़ार।। देख आँसू माई के ,लखन हुए गम्भीर।वन गमन […]

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