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आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला

——– ‘नुक़्त:’ का प्रयोग ——–

किस भाषान्तर्गत किस-किस शब्द में नुक़्त: (बिन्दी; अरबीभाषा का शब्द) का प्रयोग होगा, यह सतत अध्ययन और साधना का विषय है। बिना अध्ययन और अध्यवसाय के अनुचित प्रश्न-प्रतिप्रश्न करना, जड़बुद्धिता को प्रमाणित करता है। जो लोग नु़क़्त:-प्रयोग की उपेक्षा करते हैं, वे हज़ारों शब्दों में से कुछ को अर्थभेद-सहित समझ लें। नीचे कुछ शब्द दिये गये हैं; मनन करें :–
◆ खुदा– कोई जगह खोदी गयी।
ख़ुदा– परमात्मा।
◆ जलील–प्रतिष्ठित।
ज़लील– अधम।
◆अजब– विचित्र।
अज़ब– वह पुरुष, जो स्त्री न रखता हो।
◆अजल– श्रेष्ठ; मृत्यु।
अज़ल– अति नीच।
◆ कला– एक प्रकार की विद्या।
क़ला– शत्रुता।
◆जंग– युद्ध।
ज़ंग– मैल।
◆जारी– चलता हुआ, प्रवाहित
ज़ारी– विलाप
◆ जाल– छल
ज़ाल– पथभ्रष्ट; श्वेत केशयुक्त वृद्ध व्यक्ति
◆ कानून– चूल्हा
क़ानून– नियम

आपने देखा-समझा कि एक नुक़्त: के समुचित प्रयोग के होने और न होने पर अर्थ का कितना अनर्थ होता है।

नुक़्त: (नुक़्ता शब्द अशुद्ध है।) का प्रयोग व्यापक स्तर पर होता है। एफ़, जीएच, केएच, पीएच, क्यू, ज़ेड आदिक से सम्बन्धित ऐसे शब्द बड़ी संख्या में हैं, जिनमें नुक़्त: का व्यवहार होता है।

निम्नांकित उदाहरणों को समझें :–
★ एफ़– फ़िल्म, फ़ाइन, फ़ाइनल, प्रोफ़ेसर फ़ित्रत, फ़ुजूल (फिजूल अशुद्ध है।) फ़िदा आदिक।
★ जीएच– ग़ज़ल, ग़द्दार, ग़म, ग़रीब, ग़लत, ग़ैर आदिक।
★ केएच– ख़ास, ख़्वाब, ख़ुश, ख़ूब, ख़ारा, ख़ारिज आदिक।
★ पीएच–फ़ार्मसिस्ट, फ़ेज़, फ़िलॉसफ़र आदिक।
★ क्यू– क़ानून, क़ातिल, क़ाफ़िर, क़िस्मत आदिक।
★ ज़ेड– ज़ील, ज़मीन, ज़ूम, ज़िप, ज़ह्र, ज़ेह्न (ज़हर और ज़ेहन शब्द अशुद्ध हैं) आदिक।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १४ जून, २०२० ईसवी)

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