आचार्य पण्डित पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला

९ दिसम्बर को ही उत्तर देना था; परन्तु स्मृति से ओझल हो गया था।

आज (१० दिसम्बर) ‘खेद-सहित’/’खेदसहित’ (‘खेद सहित’ शब्द अर्थहीन हैं।) उत्तर दिया गया है।

दो शब्द हैं :―
१– ख़ुशख़बर
२– ख़ुशख़बरी
(१) ख़ुशख़बर― प्रसन्नता देनेवाली सूचना; अच्छी सूचना; सकारात्मक सूचना।
(२) ख़ुशख़बरी― यह निरर्थक शब्द है। यद्यपि बोली के रूप मे इसे ‘ख़बर देनेवाली’ के अर्थ मे प्रचलित कर दिया गया है तथापि शुद्धता की दृष्टि से यह स्वीकार्य नहीं है। फ़ारसी-भाषा का एक प्रत्यय ‘गीर’ है, जिसका अर्थ ‘पकड़नेवाला’ है। हम यदि ‘ख़बर’ के अन्त मे ‘गीर’ प्रत्यय को जोड़ते हैं तब ‘ख़बर/समाचार को पकड़नेवाला’ के अर्थ मे अरबी- फ़ारसी-शब्द ‘ख़बरगीर’ शब्द की उत्पत्ति होती है, जिसका अर्थ ‘ख़बर को पकड़नेवाला/ लेनेवाला’ है। इस प्रकार ‘ख़बरी’ के स्थान पर ‘ख़बरगीर’ होगा। हम ‘ख़ुशख़बरी’ के स्थान पर ‘ख़ुशख़बरगीर’ का व्यवहार करेंगे तब कहीं जाकर इसका अर्थ ‘प्रसन्नतापूर्ण ख़बर लेनेवाला/लेनेवाली’ का होगा।

‘ख़ुशख़बर’ शब्दों मे विशेषण (ख़ुश) और विशेष्य (ख़बर) है।

अज्ञानवश (‘अज्ञानतावश’ अशुद्ध है।) बहुसंख्यजन ‘अच्छी ख़बर’ को ‘ख़ुशखबरी’ मान और जानकर व्यवहार करते आ रहे हैं। ‘ख़बरगीर’ का अर्थ है, ‘ख़बर/विवरण/समाचार/सूचना/जानकारी पहुँचानेवाला’।
अशुद्ध वाक्य है :―
◆ खुसखबरी कौन सुनाऊँगा।

इस वाक्य को देखने पर ज्ञात होता है कि इसमे एक शब्द ‘खुसखबरी’ अशुद्ध है। इसमे दो प्रकार की अशुद्धियाँ हैं :–
(१) वर्ण-प्रयोग-सम्बन्धित
(२) नुक़्त:/नुक़्ता-प्रयोग-सम्बन्धित।
‘दन्त्य स’ के स्थान पर ‘तालव्य श’ का व्यवहार होगा। शुद्ध शब्द ‘ख़ुश’ है, जो कि ‘फ़ारसी’-भाषा का विशेषण-शब्द है। यहाँ वाक्य की शुद्धता के विचार से तीन प्रकार के वाक्य गठित होंगे :―
(१) ख़ुशख़बर कौन-सी सुनाऊँगा?
(यह अधिक उपयुक्त शब्द है; क्योंकि यहाँ छिपे हुए कर्त्ता का बोध करते हुए, केवल क्रिया के अनुसार वाक्य मे संशोधन करना है। इस वाक्य से सुस्पष्ट है कि इसका कर्त्ता-शब्द उत्तम पुरुष का सर्वनाम-शब्द ‘मै’ है। नीचे के दोनो वाक्यों मे कर्त्ता सर्वनाम का ‘वह’ शब्द है।)
(२) ख़ुशख़बर कौन सुनायेगा?
(३) ख़ुशख़बर कौन-सी सुनायेगा?

(सर्वाधिकार सुरक्षित― आचार्य पण्डित पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १० दिसम्बर, २०२३ ईसवी।)