राजेश कुमार शर्मा ‘पुरोहित’ (भवानीमण्डी)-
संसार का प्रत्येक मनुष्य जीवन में सफलता प्राप्त करना चाहता है। सफलता प्राप्त करने के लिए मनुष्य कठिन परिश्रम करता है। कृषक रात दिन खेतों में पसीना बहाता है। तब जाकर वह सफल कृषक कहलाता है। उसी प्रकार परिश्रम करते करते कई लोग महान कहलाने लगते हैं। कालिदास, तुलसी, टैगोर और गोर्की परिश्रम कर ही जीवन मे सफल हुए। बड़े बड़े धन कुबेर अम्बानी जी भी दृढ़ निश्चय के साथ आगे बढ़े और सफल हुए। गरीबी व्यक्ति खूब परिश्रम करे और उसे सफलता मिल जाये तो उसकी खुशी देखते ही बनती है।
परिश्रम ही सफलता की कुंजी है। लक्ष्य एक होना चाहिए। जिस क्षेत्र विशेष में आपको सफ़लता प्राप्त करनी है उसके लिए लक्ष्य बनाकर काम करना होगा। सफलता कदम चूमेगी। विद्यार्थी जीवन में यदि परिश्रम करने की लगन लग जाती है यो वह उच्च पदों पर पहुंच जाता है। एडिसन ने कहा था ” प्रतिभा के माने एक औंस बुद्धि और एक तन परिश्रम।
हम होंगे कामयाब इस गीत को विद्यालयों की प्रार्थना सभा मे गाया जाता है। साधारण सी यह पंक्ति हमारे मन मे आशा और विश्वास की नई रोशनी फैला देती है। और असफलता से निराश व्यक्ति के जीवन भर पुनः साहस के साथ काम मे जुट जाने की प्रेरणा देती है। आशावादी सोच ही सफलता दिलाती है। जीवन मे कभी नकारात्मक न सोचो । हमेशा सोच को सकारात्मक रखो। आशा की डोर पर ही जीवन की पतंग उड़ती है। धैर्य व विश्वास रख नेक काम करते रहो सफलता सामने खड़ी मिलेगी। राष्ट्रकवि मैथिली शरण गुप्त ने कहा ” नर हो,न निराश करो मन को। आशा होगी जीवन मे तो तन मन में नई ऊर्जा का संचार होगा।
उदास होकर बैठे रहने से सफलता नहीं मिलती। कायर व्यक्ति कभी सफल नहीं होता। गीता में साफ लिखा कर्मण्येवाधिकारस्ते मां फलेषु कदाचन। हे अर्जुन कर्म कर। फल मैं दूँगा। ईश्वर अवश्य फल देता है। पर शर्त है कर्म करना होगा। संसार मे कितने ही महान योद्धा, आविष्कारक, समाजसुधारक, बडे राजनेता हुए, क्रांतिकारी हुए सभी ने जीवन मे सम्पूर्ण मानव जाति के हितार्थ कार्य किये।
ऐसे महापुरुष ही पूजित हुए। जापान के लोगों ने परिश्रम कर विश्व मे अपनी पहचान बनाई है लिंकन, गाँधी, बोस, पटेल, कलाम ऐसी कितनी ही विभूतियों ने निरंतर लगन से काम कर सफलता हांसिल की। केवल इच्छा करने से सफलता हाथ नहीं लगती। कर्मपथ पर अग्रसर व्यक्ति ही सफल होते हैं। आज के दौर में व्यक्ति गलत हथकंडे अपनाकर या बिना परिश्रम किये सफलता प्राप्त करना चाहता है। प्रतिस्पर्धा का युग है। लोग सफल होने के लिए एक दूसरे की हत्या तक कर देते हैं। नैतिक मूल्यों का पतन होता जा रहा हैं। लोग किसी को सफलता प्राप्त देख कर ईर्ष्या करते हैं। व्यक्ति आज दुसरो के सुख देखकर ज्यादा दुखी है।
रुचि, योग्यता, प्रवीणता ,परिश्रम ये शब्द व्यक्ति की सफलता के मार्ग प्रशस्त करते हैं। इसलिए मन लगाकर रुचि के साथ कर्म करना चाहिए। रुचि के साथ ही योग्यता भी होना चाहिए। हमेशा मनुष्य को अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए प्रयासरत होना चाहिए।अपनी योग्यता में निखार लाने के लाइट स्वयं को प्रवीण बनाना होगा। मनुष्य में अपार शक्ति व दिमाग है। प्रत्येक व्यक्ति में गुण होते है। उन गुणों की पहचान कर आगे बढ़ते रहना चाहिए। अलग अलग व्यक्ति की अलग अलग रुचि होती है। व्यक्ति अपनी रुचि के अनुसार ही क्षेत्र में आगे बढ़े।
“आओ सफलता की कुंजी जाने।
अपने कर्मपथ को फिर पहचाने।”