डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय –

(प्रख्यात भाषाविद्-समीक्षक)
शब्द-अर्थ-प्रयोग-विडम्बना :—- शोध का विषय है।
आत्मा : ‘आत्मा’ को स्त्रीलिंग में प्रयोग किया जाता है।
परमात्मा : ‘परमात्मा’ को पुल्लिंग (पुंलिंग) में प्रयोग किया जाता है। इस शब्द में भी ‘आत्मा’ (परम+आत्मा ) शब्द का प्रयोग हुआ है | हमारे वैयाकरण-वर्ग ने यहाँ ‘परम-आत्मन् की आड़ लेकर इसे ‘पुंलिंग’ सिद्ध कर दिया है।
यह शोध का विषय बन जाता है।
सम्भ्रान्त : यह कुलीन, समादृत, प्रतिष्ठित आदिक अर्थ में प्रयोग होता है।
व्याकरण को आधार बनाकर इसे यदि समझा जाये तो सम्भ्रान्त : सम् (सं)+भ्रान्त= अच्छी तरह से जो भ्रमित हो
यह शोध का विषय है।
कुलीन : कु+लीन = बुराई में लीन
वहीं ‘कुलीन’ का प्रयोग उच्च कुलवाले के अर्थ में लिया जाता है।
इस विषय पर सभी व्याकरणाचार्य मौन बने हुए हैं!