● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
(शीघ्र ही इसके समस्त पक्षोँ पर विस्तृत विश्लेषण सार्वजनिक करूँगा।)
उत्तरप्रदेश का पारा तो गिर रहा है; परन्तु सियासी पारा तेज़ी मे चढ़ता दिख रहा है। हाल ही मे कुन्दरकी के विधायक ठाकुर रामवीर सिँह की पहल पर २२ दिसम्बर को क्षत्रिय-विधायकोँ ने ‘कुटुम्ब’ के नाम पर लखनऊ के क्लार्क अवध होटल मे बैठक की थी, जिसमे भा० ज० पा० के विद्रोही-असंतुष्ट विधायक एवं अन्य दलोँ के विधायक भी शामिल थे। बैठक आठ वर्ष मे पहली बार की गयी है। उसके दूसरे ही दिन ब्राह्मण-विधायकोँ ने भी ‘सहभोज’ के नाम से अपनी बैठक कर डाली थी, जोकि दोनो ही की ओर से एकप्रकार का आमने-सामने का शक्तिप्रदर्शन था।
अब सवाल मुँह बाये खड़ा है– दोनो ओर से आँखेँ दिखातीँ सियासी अँगड़ाई क्या-क्या गुल खिलनेवाली हैँ? इन क्रियाओँ की प्रतिक्रियाएँ भी बेहद दिलचस्प होँगी। क्षत्रिय-बैठक से यह सुस्पष्ट हो चुका है कि उत्तरप्रदेश-शासन मे सबकुछ ठीक-ठाक नहीँ है। क्षत्रिय-विधायक ‘घोर ठाकुरवादी’ मुख्यमन्त्री कहलानेवाले आदित्यनाथ से किसप्रकार की अपेक्षा करते हैँ वा फिर सारे दलोँ के ठाकुरवादियोँ ने आदित्यनाथ के पक्ष मे एकजुटता की कोई मुहिम शुरू कर दी हो; क्योँकि उत्तरप्रदेश मे त्रिकोणीय राजनीति दिखने लगी है, जिसमे ‘अमित शाह+केशवप्रसाद मौर्य = योगी को हटाओ’ का गणितीय सूत्र साफ़-साफ़ दिखने लगा है। फ़िलहाल, क्षत्रिय बनाम ब्राह्मण के तत्कालीन ‘टी-२०’ मैच का कोई परिणाम नहीँ निकला है।
उत्तरप्रदेश मे ४६ ब्राह्मण विधायक भारतीय जनता पार्टी के हैँ। वे सब बैठक मे सम्मिलित थे। पक्ष-विपक्ष के कुल ५२ ब्राह्मणो को पिछले २३ दिसम्बर को कुशीनगर के विधायक पी० एन० पाठक (पंचानन्द पाठक) के घर मू उपस्थित होना बताया गया है, जिनमे भूमिहार ब्राह्मण भी सम्मिलित हैँ।
ब्राह्मणो की आवाज़ दबायी जा रही है; मुख्य मुद्दोँ पर बात नहीँ की जा रही है। कुछ जातिविशेष (ठाकुर/क्षत्रिय, दलित, पिछड़ी जातियाँ इत्यादि) के लिए यह सरकार नियम-क़ानून को ताक़ पर रखकर काम करती आ रही है; क्योँकि योगी आदित्यनाथ स्वयं ‘ठाकुर’ हैँ। भारतीय जनता पार्टी और अन्य विपक्षी दलोँ के ब्राह्मण-विधायकोँ ने एक होकर इसपर चिन्ता व्यक्त की है।
चूँकि शीतकालीन सत्र चल रहा है, इसलिए इस आकस्मिक बैठक का किया जाना, वर्तमान उत्तरप्रदेश-शासन की नीति और नीयत पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता हुआ दिख रहा है। उधर, इन बैठकोँ की जानकारी पाते ही शासन के गलियारे मे साँस का ऊपर-नीचे उठना शुरू हो गया है।
(सर्वाधिकार सुरक्षित :– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २४ दिसम्बर, २०२५ ईसवी।)