हम आज़ादी का मूल्य भूलते जा रहे हैँ!…?
● आयोजक– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय मानवमात्र के प्रति अपना कर्त्तव्य-निर्वहण करना ही स्वतन्त्रता है डॉ० विवेकमणि त्रिपाठी(एसोशिएट प्रोफ़ेसर– हिन्दी, क्वान्ग्तोंग विदेशी भाषा विश्वविद्यालय, चीन) “स्वतन्त्रता मे व्यक्तित्व-विकास की अपार सम्भावनाएँ हैं”● डॉ० नीलम जैन(विज़िटिंग […]