मनुस्मृति कहती है ‘आमन्त्रितस्तु यः श्राद्धे वृषल्या सह मोदते’
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– धर्मग्रंथों में किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा केवल उसके ज्ञान, पद या सामाजिक पहचान से नहीं, बल्कि उसके आचरण, संयम और चरित्र से निर्धारित होती है। विशेषकर जिस व्यक्ति को धार्मिक कर्म […]