शिवत्व की यात्रा : धर्म और प्रेम का द्वंद्व
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– रात धीरे-धीरे गहरी हो चुकी थी। आकाश में चन्द्रमा बादलों के पीछे छिपता-उभरता जा रहा था। सुधांशु के घर के आँगन में एक दीपक जल रहा था जिसकी लौ हवा के […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– रात धीरे-धीरे गहरी हो चुकी थी। आकाश में चन्द्रमा बादलों के पीछे छिपता-उभरता जा रहा था। सुधांशु के घर के आँगन में एक दीपक जल रहा था जिसकी लौ हवा के […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– संध्या का समय था। सूर्य पश्चिम दिशा में ढल रहा था और आकाश में लालिमा फैलती जा रही थी। सुधांशु आश्रम की पगडंडी से आगे बढ़ रहा था। उसके कदम धीमे […]
शब्दसंधान ● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय तो आइए! हम अब प्रत्येक शब्द के अर्थगौरव से परिचित हो लेँ। शब्द हैँ :– श्री रामनवमी, भए, प्रगट, कृपाला तथा दीनदयाला। ‘श्री रामनवमी’ के संदर्भ मे “भये प्रगट […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– भोर का समय था। पूर्व दिशा में सूर्य की हल्की आभा प्रकट होने लगी थी। आश्रम के चारों ओर फैली निस्तब्धता धीरे-धीरे पक्षियों के कलरव से टूट रही थी। वृक्षों की […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव-– रात का अंतिम प्रहर था। आकाश में चन्द्रमा अपनी शीतलता बिखेर रहा था। आश्रम के पीछे बहने वाली छोटी-सी धारा से जल की मधुर ध्वनि सुनाई दे रही थी। वृक्षों के […]
◆ गणेशशंकर विद्यार्थी के बलिदान-दिनांक (२५ मार्च) के अवसर पर विशेष प्रस्तुति ● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••• गणेशशंकर विद्यार्थी एक ऐसा नाम है, जिनके व्यक्तित्व और कर्त्तृत्व (‘कृतित्व’ अशुद्ध शब्द है।) मे तीन प्रकार गुण […]
क्रान्तिकारी गणेशशंकर विद्यार्थी के बलिदान-दिनांक (२५ मार्च) पर विशेष प्रस्तुति ● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••• योँ तो क्रान्तिधर्मी गणेशशंकर विद्यार्थी ने कई समाचारपत्र-पत्रिकाओँ मे लेखन और सम्पादन किया था; परन्तु वे स्वयं के लिए जैसी […]
लीमा। पेरू में भारतीय दूतावास द्वारा ‘नमस्ते पेरू’ नामक एक भव्य सांस्कृतिक और व्यापारिक मेला आयोजित किया गया। इस मेले में भारतीय मूल के नागरिकों के अलावा स्थानीय लोगों का एक बड़ा हुजूम उमड़ा। चेरेटी […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– वसंत का प्रारम्भ हो चुका था। आम के वृक्षों पर कोमल बौर आ गया था और हवा में एक मदमस्त सुगन्ध फैलने लगी थी। जीवन में जैसे एक हल्का-सा उल्लास लौट […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– शूद्र गँवार ढोल पशु नारीये ताड़न की अधिकारी है।जाति-पाँति से हीन रहीयुग-युग से वह बेचारी है।बुद्धिमान होकर भी नारीजाहिल समझी जाती है।गैरों का पाप लिए सिर परवह दर-दर ठोकर खाती है।जीवन […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– शीत ऋतु का प्रारम्भ था। प्रातःकाल की धूप अभी कोमल थी और हवा में हल्की ठंडक थी। निरंजन अपने घर के बाहर बैठा था। सामने आँगन में तुलसी के चौरे पर […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– वर्षा का समय समाप्त हो चुका था। आकाश स्वच्छ था और हवा में हल्की शीतलता घुलने लगी थी। संध्या का समय था। निरंजन घर के आँगन में बैठा था। सामने तुलसी […]
Dr. Raghavendra Kumar Raghav– When the limits of my sorrow, Are finally crossed, I’ll find no strength to borrow, In silence, I’ll be lost. Like a stone, I will harden, While you try to appease, […]
न्यूयॉर्क। भारत ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र के मंच पर दोहरा रवैया अपनाने के लिए पाकिस्तान को खरी-खोटी सुनाई है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र की एक बैठक के दौरान पाकिस्तान की ओर से फर्जी […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– उस रहस्यमयी अतिथि के जाने के बाद कई दिनों तक निरंजन के भीतर एक अजीब जिज्ञासा बनी रही। वह व्यक्ति कौन था? उसका उद्देश्य क्या था? और उसे कैसे पता था […]
– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–पछुआ मन घायल करे, पुरुआ करे उदास।झरते पत्ते शाख से, कोई आस-न-पास।।दो–देश लगे पतझर यहाँ, कोई हाल-न-चाल।मौसम निर्मम इस तरह, खीँच रहे सब खाल।।तीन–पंख घृणा फैला दिखे, करे कष्ट संवाद।मानव-मानव […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– शरद की एक गहरी रात्रि थी। आकाश में बादल छाए हुए थे और हवा में एक विचित्र नमी थी। घर के बाहर पीपल के पत्तों की हल्की सरसराहट सुनाई दे रही […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– समय अपने शांत प्रवाह में आगे बढ़ता रहा। निरंजन का जीवन अब एक संतुलित लय में चल रहा था। सुबह का ध्यान, दिन भर का श्रम, परिवार की जिम्मेदारियाँ और रात्रि […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव— समय धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था। निरंजन का जीवन अब आश्रम की एकांत साधना से निकलकर गृहस्थ जीवन की जटिलताओं में प्रवाहित हो चुका था। उसका घर छोटा था, जीवन साधारण […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• ८ मार्च की तारीख़ भारतीय क्रिकेट की दृष्टि से देश को गौरवान्वित करनेवाली थी और सबकी निगाहेँ गुजरात के नरेन्द्र मोदी स्टेडियम की पिच पर संध्या ७ बजे स्थिर हो […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– प्रभात का समय था। पूर्व दिशा में सूर्य की पहली किरणें आकाश को हल्की स्वर्णिम आभा से भर रही थीं। आश्रम के प्रांगण में शांति थी, पर उस शांति के भीतर […]
रैन-बसेरा, अल्लापुर में होली-कविसम्मेलन प्रयागराज। गत दिवस होलिकोत्सव के अवसर पर व्याकरणवेत्ता एवं भाषाविज्ञानी आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की अध्यक्षता मे प्रयागराज की कवि-कवयित्रियों ने रैन-बसेरा, बाघम्बरी गृह-योजना, अल्लापुर, प्रयागराज मे अपनी-अपनी रंग-विरंगभरी कविताओँ से […]
‘विश्वमहिला-दिवस’ पर ‘सर्जनपीठ’ का विशेष आयोजन•••••••••••••••••••••••••••••••••••• प्रयागराज। प्रतिवर्ष ‘विश्व महिला-दिवस’ का आयोजन होता है और उसके लिए अलग-अलग विषय भी निर्धारण किये जाते हैँ; परन्तु खेद का विषय है! किसी विषय का कोई क्रियान्वयन् नहीँ […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– शरद पूर्णिमा की रात्रि थी। चन्द्रमा का प्रकाश आश्रम की शिला-दीवारों पर शान्त चाँदी-सा बिछा हुआ था। हवा में न शीत का तीखापन था, न वर्षा की नमी—केवल एक निर्मल संतुलन। […]
‘सर्जनपीठ’ का ‘अज़ीम शाइर फ़िराक़ गोरखपुरी और उनकी सार्वकालिक रचनाशीलता’ विषयक राष्ट्रीय आन्तर्जालिक आयोजन प्रयागराज। एक ख़ूबसूरत एहसास का नाम है, फ़िराक़। ग़ज़ल, नज़्म, रुबाई के साथ-साथ, समालोचना और इतिहास पर भी क़लम चलानेवाले रघुपति […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– प्रभात का समय था। आश्रम में सामान्य दिनचर्या प्रारम्भ हो चुकी थी—गौशाला में सेवा, रसोई में धूप की सुगन्ध, प्रार्थना का मधुर गान। परन्तु निरंजन के भीतर कुछ असामान्य था। समाधि […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– शरद की स्वच्छ रात्रि थी। आकाश निर्मल, तारकाओं से भरा हुआ, मानो अनन्त का प्रत्यक्ष साक्षात्कार हो रहा हो। आश्रम के उत्तर दिशा में स्थित उस प्राचीन पीपल वृक्ष के नीचे […]
प्रयागराज। गत दिवस विकास-खण्ड सोराँव के अन्तर्गत संचालित प्राथमिक विद्यालय, इस्माइलगंज प्रथम मे अत्यन्त भव्य ढंग से वार्षिकोत्सव सम्पन्न हुआ, जिसमे छात्र-छात्राओँ ने आदर्शपूर्ण तरीक़े से होली खेली; वहीँ कार्यक्रम मे उपस्थित समस्त अतिथिवृन्द एवं […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– वर्षा ऋतु का अन्तिम चरण था। आकाश स्वच्छ था, परन्तु वायु में अभी भी जल की शीतलता थी। आश्रम के उत्तर दिशा में एक प्राचीन कक्ष था, जिसे नाद-मण्डप कहा जाता […]
शिवांकित तिवारी, जबलपुर, मध्यप्रदेश। जहाँ आजकल शादियाँ भव्यता और दिखावे का प्रतीक बन चुकी हैं, वहीं जबलपुर के युवा दंपति आशीष और कल्याणी ने अपने विवाह को सामाजिक जागरूकता का अभियान बना दिया। 5 फरवरी […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– आश्रम में उस दिन एक गंभीरता थी। प्रभात की वायु में भी जैसे कोई गूढ़ संकेत था। निरंजन शिवालय के सामने बैठा था, पर आज उसका ध्यान स्थिर नहीं था। उसके […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– श्रावण का अन्तिम सप्ताह बीत चुका था। आश्रम का वातावरण अब अधिक शांत था। वर्षा की रिमझिम ध्वनि, वृक्षों से टपकती जल-बूँदें और दूर बहती नदी का मधुर स्वर—सब मिलकर एक […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– आश्रम में उस दिन एक विशेष वातावरण था। श्रावण मास का अंतिम सोमवार था। प्रातःकाल से ही शिव-मंदिर में अभिषेक चल रहा था। जल, दुग्ध, बिल्वपत्र और मंत्रोच्चार से पूरा परिसर […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– प्रभात का समय था। आश्रम के पीछे बहने वाली छोटी नदी के तट पर निरंजन अकेला बैठा था। जल का प्रवाह शांत था, परन्तु उसके भीतर निरन्तर गति थी। वह उसी […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– प्रातःकाल का समय था। आकाश में हल्की लालिमा फैल रही थी। पूर्व दिशा में सूर्य अभी उगा नहीं था, परन्तु उसका संकेत धरती को जागृत कर चुका था। आश्रम के प्रांगण […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– महाशिवरात्रि की उस साधना-रात्रि के पश्चात् गाँव का वातावरण जैसे दीर्घकाल तक उसी भाव में डूबा रहा। यह परिवर्तन क्षणिक उत्साह का परिणाम नहीं था; यह धीरे-धीरे लोकजीवन में उतरने लगा। […]
निराला के जन्म-दिनांक (२१ फ़रवरी) पर विशेष प्रस्तुति ● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• इलाहाबाद का नाम आते ही प्रथम पंक्ति मे जिस साहित्यिक अक्खड़ हस्ताक्षर का नाम-रूप दिखता है, वह सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ का है। […]
निराला के जन्मदिनांक (२१ फ़रवरी) पर विशेष प्रस्तुति प्रयागराज। प्राय: देखा गया है कि पति को सन्मार्ग पर चलने के लिए पत्नी ही प्रेरित करती आयी है और उस पथ पर चलते हुए, वह पति […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव — दार्शनिक चर्चा ने गाँव की चेतना को गहरा किया था, पर अब एक नया प्रश्न उठने लगा— क्या यह समस्त साधना केवल आन्तरिक है, या इसके लिए परम्परागत उपासना की […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– वटवृक्ष के नीचे होने वाली मौन-साधना ने गाँव के जीवन को केवल सामाजिक नहीं, दार्शनिक आयाम भी प्रदान कर दिया था। अब प्रश्न केवल व्यवहार के नहीं रहे; वे अस्तित्व के […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव-– गाँव में बाहरी व्यवस्था के साथ समन्वय स्थापित हो जाने के बाद जीवन पुनः अपनी सहज गति में लौट आया, किन्तु भीतर कुछ ऐसा था जो अब पहले जैसा नहीं रहा। […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– चेतना का प्रसार जितना शांत दिखाई देता है, उसका प्रभाव उतना ही व्यापक होता है। गाँवों में उभर रही नई पद्धति—जहाँ निर्णय सामूहिक होते थे, जहाँ न्याय करुणा के साथ संतुलित […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– गाँव के मध्य स्थित वह विशाल वटवृक्ष अब केवल छाया का स्थान नहीं रहा था; वह सामूहिक चेतना का केन्द्र बन चुका था। उसकी जटाओं की भाँति गाँव के लोगों के […]
राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’– फरवरी महीने का दूसरा सप्ताह प्रेमियों के लिए होली, दीपावली और ईद से भी कहीं बढ़कर होता है। तरह-तरह के पक्षियों का दाने की तलाश में उड़ान भरते नजर आना मामूली […]
मै ख़ुशियाँ ढूँढ़ता हूँ हर ओर, मगर दुःख हमे ढूँढ़ते हैं। मै भलाई करता हूँ राघव, लोग कमियाँ ढूँढ़ते हैं। हमे नारियल समझकर लोग, तोड़ते और फोड़ते हैं। बड़ी उलझन मे हूँ आजकल, रिश्ते बनने […]
नई दिल्ली। भारत का विदेश मंत्रालय और इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (आईओएम) सुरक्षित एवं व्यवस्थित प्रवासन को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। इस दिशा में आगे बढ़ते हुए विदेश मंत्रालय ने […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– शिव न किसी एक रूप, मूर्ति या कल्पना तक सीमित हैं। शिव तत्त्व हैं—अविनाशी, अव्यक्त और सर्वव्यापक।वेद उद्घोष करते हैं— “एको देवः सर्वभूतेषु गूढःसर्वव्यापी सर्वभूतान्तरात्मा।”(श्वेताश्वतर उपनिषद् 6.11) शिव वही एक देव […]
लखनऊ। पत्रकारिता जगत में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए पत्रकार प्रेस परिषद ने भारत में पहली बार अपने संगठन में अनिवार्य ड्रेस कोड लागू कर पत्रकारों को एक नई और सशक्त पहचान दी है। परिषद […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– “विद्या परमं धनम्।” — यह केवल एक सूक्ति नहीं, अपितु भारतीय सभ्यता की आत्मा है। मानव इतिहास में यदि किसी संस्कृति ने ज्ञान को सत्ता, संपत्ति और सामर्थ्य से ऊपर स्थान […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– लंका अब केवल नगर नहीं थी—वह एक भय-शाला बन चुकी थी। रावण ने सभा में कहा—“अब मेरा पुत्र जाएगा।” इंद्रजीत। जिसने कभी पराजय नहीं देखी थी।जिसके अस्त्र देवताओं को भी चकित […]
पं० मोतीलाल नेहरू की पुण्यतिथि (६ फ़रवरी) की स्मृति मे ● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••• समय व्यतीत होता रहा। अँगरेज़-शासन और प्रशासन ने पं० मोतीलाल नेहरू के विरोधी दृष्टिकोण को भाँप लिया था; फलस्वरूप उन्हेँ […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– समुद्र सामने था—अथाह, गंभीर और चुनौतीपूर्ण। यह वही समुद्र थाजो रावण के अहंकार की सीमा बन चुका था। वानर सेना ठिठकी नहीं,पर प्रश्न था—“कैसे?” राम मौन थे। विभीषण ने सागर से […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– हनुमान लौट आए थे। समुद्र के उस पार से नहीं,बल्कि एक नए युग की घोषणा लेकर। उन्होंने जो देखा था,जो किया था—वह केवल कथा नहीं थी,वह प्रमाण था। वानर सेना पहले […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– प्रेम सभी भावों में सबसे पावन और महान है।प्रेम बिना जग सूना है और जीवन वीरान है।मन, विचार और हृदय मे गहरे तक है प्रेम बसा।प्रेम नित्य और ईश्वर है इसकी […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– हनुमानजी ने लंका को पहली बार देखा तो ठिठक गए। यह वैसी नहीं थी जैसी कथाओं में कही गई थी।यह केवल भय की नगरी नहीं थी—यह वैभव की नगरी थी। स्वर्ण-प्रासाद, […]
प्रयागराज। इन दिनो देश के शिक्षालय-परिसर मे एक ही बात की अनुगूँज सुनायी पड़ रही है, जोकि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यू० जी० सी०– युनिवर्सिटी ग्राण्ट कमीशन) की ओर से विगत १५ जनवरी को लागू की […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– रावण को किसी ने देखा नहीं था—फिर भी सबने उसे देखा हुआ मान लिया था। किष्किंधा से दक्षिण की ओर बढ़ते वानर-दल के पाँव दृढ़ थे,पर मन अनिश्चित। वन बदलते जा […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– वह वन निःशब्द था। पत्तों पर गिरती धूप तक जैसे ठिठक गई हो।धरती पर पड़ा वह वृद्ध गिद्ध—जटायु—अब उड़ नहीं सकता था, पर उसकी आँखों में अब भी आकाश शेष था। […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– गिरना भी भाँति-भाँति का होता है।चलते-चलते गिर जानाकिसी से टकराकर गिर जाना।नैतिकता के आँचल से गिर जाना।और तो और अपनो की नजरों से गिर जाना।लेकिन सबसे निकृष्ट हैअपनी नजरों मे गिर […]
न्यूयॉर्क। भारत ने मध्य-पूर्व के अस्थिर देशों में संघर्ष समाप्त करके शांति स्थापित करने की वकालत की है। भारत ने कहा है कि लगातार बातचीत और डिप्लोमेसी से ऐसे टिकाऊ हल निकलेंगे, जिनका लोगों की […]
नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा है कि वर्तमान में वैश्विक अस्थिरता और वैश्विक अर्थव्यवस्था के संकट में होने के बावजूद भारत अपनी संतुलित विदेश नीति और दूरगामी सोच के बलबूते तेजी से विकास […]
Dr. Raghavendra Kumar Raghav– In India, the moment the subject of equality arises, public debate often slips from reason into emotion, and then into outright accusations. This is especially evident whenever equality-based provisions introduced by […]
‘गणतन्त्र-दिवस’ के अवसर पर विशेष प्रस्तुति प्रयागराज। ‘सर्जनपीठ’, प्रयागराज की ओर से भारतीय गणतन्त्र-दिवस की पूर्व-संध्या मे एक राष्ट्रीय बौद्धिक परिसंवाद का आयोजन किया गया, जिसमे देश के प्रतिष्ठित न्यायाधीश, अधिवक्ता एवं अन्य प्रबुद्धजन की […]
एस०बी० सेंगर– हरदोई। जिले की विधानसभा बालामऊ में भाजपा के कछौना मंडल के एक बूथ अध्यक्ष ने एक व्यक्ति पर गोली मारने की धमकी सहित कई गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित ने हरदोई के प्रभारी […]
प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच विवाद लगातार गहराता जा रहा है। मौनी अमावस्या स्नान के दिन की घटनाओं को लेकर मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– नीतिवान मनुष्यों की चाहे कोई बुराई करे या उसकी प्रशंसा करे, वह निर्धन हो जाए या वह धनवान हो, उसका स्वभाव सदैव नम्र होता है। वह अपने सिद्धांतों पर अडिग रहता […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– सबसे पहले ब्राह्मण को पुनर्मूल्यांकन की आवश्यकता है। यह कथन किसी वर्गविशेष के अपमान या सामाजिक विद्वेष से प्रेरित नहीं, अपितु धर्म-संरक्षण और सामाजिक सुचिता की गम्भीर चेतावनी है। जिस प्रकार […]
ब्रिस्बेन। ऑस्ट्रेलिया के ब्रिस्बेन में प्रथम ‘प्रशांत क्षेत्रीय हिंदी सम्मेलन’ का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें ऑस्ट्रेलिया के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ न्यूजीलैंड, फिजी एवं प्रशांत द्वीप राष्ट्रों से हिंदी के विद्वानों, शिक्षाविदों और साहित्य […]
Dr. Raghavendra Kumar Raghav— The human body is composed of the five great elements—earth, water, air, fire, and ether. In the Indian philosophical tradition, these five are not merely components of the body; they are […]
भारत ने यूएन को चेताया- पाकिस्तान चला रहा ‘बांटने वाला एजेंडा’ न्यूयॉर्क। भारत ने पाकिस्तान पर संयुक्त राष्ट्र के मंच का गलत इस्तेमाल करके अपना ‘बांटने वाला एजेंडा’ चलाने का आरोप लगाया है। पाकिस्तानी राजनयिक […]
डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. जे. पी. पांडेय के नेतृत्व में विश्वविद्यालय के कलाम इनक्यूबेशन सेंटर, ए.के.टी.यू. लखनऊ में राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस–2026 के अवसर पर स्टार्टअप कैपेसिटी डेवलपमेंट कार्यक्रम “मार्केट […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– प्रकृति हँसे सबसे कहे, छठा तत्त्व पहचान।नाम प्रेम है उसका, जो दे सबको प्राण॥ठोस तरल ये कुछ नहीं, न दृष्टि न स्पर्श।फिर भी सबमें व्याप्त है, बन जीवन का हर्ष॥प्रेम बिना […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– मानव शरीर पंचतत्त्व से निर्मित है। ये पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और आकाश के रूप मे जाने जाते हैं। भारतीय दार्शनिक परम्परा में ये पाँचों तत्त्व केवल शरीर के घटक नहीं […]
विज्ञान भारती, एन.सी.ई.आर.टी.व एन.सी.एस.एम.के तत्त्वावधान में विद्यार्थी विज्ञान मंथन के राज्य स्तरीय शिविर का आयोजन आज जी0डी0 गोयनका पब्लिक स्कूल लखनऊ में राज्य समन्वयक प्रदीप नारायण मिश्र के समन्वयन में किया गया। इस परीक्षा में […]
जो रहना चाहता है दूररहने दे।वो जो करना चाहता हैकरने दे।जो तेरा नहींतेरे पास क्या करेगा?उसे उसके हाल पररहने दे।जिन्दा रखतू अपनी खुद्दारी।जो हो रहा हैउसे होने दे।किरदारों का क्या बंदेआज कुछ और कुछ कल?हँसकर […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••एक–ठिठुरन ठिठकी ठण्ढ मे, टूट देह की जोड़।माघ-पूस की शीत मे, धरती पड़े न गोड़१।।दो–हवा हवाई हाल है, ख़तरे मे मुसकान।जीव-जगत् जड़ जोड़ता, जाड़े से हलकान।।तीन–जड़-चेतन हैँ काँपते, माँग रहे हैँ […]
हम मलिन यों कर चुके हैं संस्कारों को तुम्हारे ;औ’ धरे ही रह गये हैं शिष्टता के सूत्र सारे। हो निरापद घूमते हम कृत्रिम यह ब्रह्माण्ड साराऔर बताते हैं स्वयं को भाग्य का मारा अभागा।क्लिष्ट […]
डॉ० कल्पना वर्मा
भारतेन्दु के साहित्य मे समयसत्य चिन्तन मुखरित होता है••••••••••••••••••••••••••••••••••• प्रयागराज। ‘सर्जनपीठ’, प्रयागराज के तत्त्वावधान मे आधुनिक हिन्दी-साहित्य के पितामह भारतेन्दु हरिश्चन्द की पुण्यतिथि की पूर्व-संध्या मे ‘भारतेन्दु हरिश्चन्द के साहित्य मे सामाजिक व्यवस्था के अत्याचार […]
नेपीडॉ। म्यांमार की राजधानी नेपीडॉ की येजिन टाउनशिप में भारत द्वारा समर्थित कृषि क्षेत्र से जुड़े दो क्विक इम्पैक्ट प्रोजेक्ट्स (क्यूआईपी) का उद्घाटन किया गया। भारत की वित्तीय सहायता से पूर्ण इन परियोजनाओं से स्थानीय […]
शाश्वत तिवारी– देश के भीतर हो रही शिक्षा, प्रतिष्ठा और आतंक की खतरनाक जुगलबंदी पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह द्वारा ‘वाइट-कॉलर आतंकवाद’ को लेकर व्यक्त की गई चिंता केवल एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि भारत की […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– जैव जगत्, प्राणी समूह एवं सकल दृश्य अदृश्य सत्ता के रूप में वह सर्वोच्च सत्ता ही सर्वत्र अभिव्यक्त है। ईश सृजित इस सृष्टि में प्रत्येक प्राणी आदरणीय है और पारिस्थितिक तंत्र […]
Dr. Raghavendra Kumar Raghav The Bhagavad Gita’s sacred song,Invites us to a devotion strong.In this world of boundaries, wide and deep,Bhakti’s power, our souls it seeks to sweep. Vedanta’s wisdom, ancient and grand,Transcends the limits […]
प्रयागराज। अभिनव वर्ष की पूर्व-संध्या मे ‘सर्जनपीठ’, प्रयागराज की ओर से एक राष्ट्रीय आन्तर्जालिक बौद्धिक परिसंवाद-आयोजन किया गया, जिसमे प्रबुद्धजन ने अपनी-अपनी चिन्ता के साथ अपना-अपना विचार और संकल्प सार्वजनिक किया। आशा राठौर (सहायक प्राध्यापक– […]
राघवेन्द्र कुमार राघव– जीवन चाहे जितनी भी परीक्षाएँ ले,कितने ही कठिन मोड़ क्यों न आएँ,बस एक दीप सदैव जलाए रखना—“मैं कर सकता हूँ…मैं आगे बढ़ सकता हूँ…और मेरा विश्वासमुझे वहीं पहुँचाएगाजहाँ मेरी नियति चमकती है।” […]
मेरे दादा (भाई बाबा) उस पीढ़ी के मुखिया और बड़े भाई थे, जिसमें बड़े भाई का सम्मान पिता की तरह होता था। साथ ही बैसवारा की परंपरा कि बड़े भाई को खेती-बाड़ी और घर-दुवार के […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• इन दिनो उत्तरप्रदेश के सियासी गलियारोँ मे एक ही बात की अनुगूँज उठ रही है– आदित्यनाथ योगी का सिँहासन डोल रहा है और इसके पीछे उनके अपने ही लोग हैँ, […]
उपवन से चार पांचचेरी के पौधे लेकरआऊंगा फिर तुमअपने कोमल हाथोंसे घर के ऑंगनमें लगा देना उनको रोज सुबहनीर में पिला दूंगावो आहिस्ता सेफिर बड़े हो जायेंगेपश्चात उनमें फूलनिकल आयेंगेजिससे अपने गृह कोसतायेंगे मिलकर दोनों […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••(शीघ्र ही इसके समस्त पक्षोँ पर विस्तृत विश्लेषण सार्वजनिक करूँगा।) उत्तरप्रदेश का पारा तो गिर रहा है; परन्तु सियासी पारा तेज़ी मे चढ़ता दिख रहा है। हाल ही मे कुन्दरकी के […]
Dr. Raghavendra Kumar Tripathi Raghav– A meaningful understanding of Indian scientific heritage requires a comparative perspective that situates it alongside other global scientific traditions, particularly Western science. Such a comparison does not aim to establish […]
हरदोई– पी० बी० आर० इण्टर कॉलेज में महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की जयंती के अवसर पर रसायन विज्ञान प्रवक्ता श्री प्रदीप नारायण मिश्र के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय गणित दिवस बड़े उत्साह एवं शैक्षणिक गरिमा के […]
‘O’ Dear! My Dear! Recall the first friend you know.Then Smile of mother shines and her steps softly into show. If do you recall your strength, may found only your father.He is powerhouse of children […]
राघवेन्द्र कुमार ‘राघव’– मेरी जिन्दगी की यारों शाम भी अब ढल गयी।क्या से क्या हो गया और किस्मत बदल गयी।स्वप्न मेरे उससे टूटे जो सुबह थी और शाम थी।हाय किस्मत देखिए मुझे गुनहगार बना दिया।मेरे […]
नई दिल्ली। भारत यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) पर बातचीत को लेकर एक ‘निर्णायक दौर’ में प्रवेश कर रहा है और ऐसे समय में नीदरलैंड सहित प्रमुख ईयू सदस्यों का समर्थन […]
मेरे घर की शान डगरुआ,खूब मुझे भटकाता है ।तोतिल वाणी के शब्दों से,खूब मुझे, बहलाता है ।। मेरे जी की जान डगरुआ,लेकर छड़ी नचाता है ।आगे-आगे खुद चलता,और पीछे मुझे चलाता है ।। मेरा कहना […]
——————————————– “पत्रकारोँ के बिना किसी राष्ट्र का विकास नहीँ हो सकता”– महेन्द्र सिंह•••••••••••••••••••••••••••••••••••••• “मुझे प्रयागराज विश्व मे सबसे अच्छा लगता है। आप प्रयागक्षेत्र मे चले जाइए, वहाँ गंगा-यमुना से अधिक सरस्वती का ही दर्शन होता […]
भारतीय परम्परा के आधुनिक नैतिकता से अधिक वैज्ञानिक होने का प्रमाण : नियोग भारतीय वैदिक परंपरा को लेकर आज एक सामान्य प्रवृत्ति दिखाई देती है कि हम उसे या तो आँख मूँदकर पूजते हैं या […]
सेज ग्रुप द्वारा भोपाल में आयोजित INFLUENCER AWARD 2025 के अन्तर्गत नमन सोनी द्वारा Ott platform पर कई वेब सीरीज एवं कई शो मे दमदार अभिनय लिए सम्मानित किया गया। https://www.indianvoice24.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot_20251216-191815_Gallery.jpg सेज ग्रुप द्वारा एक्टर […]
ग्रामीण क्षेत्रों में मित्रता और प्रतिस्पर्धा का प्रतीक गुल्ली- डंडा खेल भारत का पारंपरिक और लोकप्रिय खेल रहा है। गुल्ली- डंडा को खेलने के लिए किसी महंगे उपकरण या विशेष मैदान की आवश्यकता नहीं होती […]