राघवेन्द्र कुमार राघव–
जीवन चाहे जितनी भी परीक्षाएँ ले,
कितने ही कठिन मोड़
क्यों न आएँ,
बस एक दीप
सदैव जलाए रखना—
“मैं कर सकता हूँ…
मैं आगे बढ़ सकता हूँ…
और मेरा विश्वास
मुझे वहीं पहुँचाएगा
जहाँ मेरी नियति
चमकती है।”
यही विश्वास
जीवन की वह शक्ति है,
जो अधूरे को
पूरा कर देती है,
बिखरे को समेट लेती है,
और इंसान को
अपनी ही सीमाओं से
ऊपर उठा देती है।
Related Articles
कविता : दौर
November 21, 2023
0
बंटवारा
March 3, 2024
0
चाहता है आदमी विश्व ग्राम बना लूँ
June 21, 2019
0