शिवत्व की यात्रा का एक और चरण : आसक्ति से मुक्ति

February 23, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– प्रभात का समय था। आश्रम के पीछे बहने वाली छोटी नदी के तट पर निरंजन अकेला बैठा था। जल का प्रवाह शांत था, परन्तु उसके भीतर निरन्तर गति थी। वह उसी […]

आइए! हम सब न केवल प्रभु को मानें, बल्कि प्रभु की भी मानें

November 2, 2017 0

जब भगवान अपना स्वरूप प्रकट करता है तब न जाने उसके कितने बंदों के अंदर एक साथ वो दीप्ति, वो प्रकाश प्रकाशित होने लगता है, जो ईश्वरीय प्रकाश कहा जाता है। संसार को जगाने के […]