देश की एक गैर सरकारी संस्था द्वारा पिछले कई वर्षों में अनवरत प्रयास किये गए जिसका मैं स्वयं राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी के पद पर रहा हूँ ..
उद्देश्य;
देश में आर्थिक/सामाजिक/राजनैतिक न्याय स्थापित हो।
इसलिए अपनी निजी क्षमताओं के दम पर देश की वित्तीय गड़बड़ियों को पूर्णतः समाप्त करने हेतु पिछली काँग्रेस सरकारों व मौजूदा भाजपा की मोदी सरकार एवं उससे जुड़े समस्त सरकारी वित्तीय इंस्टिट्यूशन्स को अनगिनत बार पत्र व्यवहार द्वारा व व्यक्तिगत मुलाकातों द्वारा बताया/समझाया गया है कि देश में वित्तीय भ्रष्टाचार को पूर्णतः समाप्त करने का स्थायी उपाय एक मात्र “100% डिजिटल करेंसी सिस्टम” (कैशलेस सोसाइटी) को लागू करना है।
100% डिजिटल करेंसी सिस्टम लागू होते ही मौजूदा सभी प्रकार के आर्थिक लेन-देन देश के प्रत्येक नागरिक द्वारा ऑन रिकॉर्ड किये जाने लगेंगे क्योंकि तब और कोई ऑप्शन ही नही बचेगा कि वे अन्य किसी माध्यम द्वारा आर्थिक ट्रांजेक्शन कर सकें।
ऐसा नही है कि मौजूदा केंद सरकार में बैठे धूर्त/हरामखोर कुराजनेताओं व उनकी सरकारी सभी वित्तीय इंस्टिट्यूशनल बॉडी को 100% डिजिटल करेंसी सिस्टम लागू होने के बाद के परिणाम पता नही हैं, उन्हें सब पता है इसीलिए वो यह कांसेप्ट लागू नही करना चाहते।
उन्हें अच्छे से पता है कि यदि 100% डिजिटल करेंसी सिस्टम लागू करवा दिया तो फिर किसी भी प्रकार का मौद्रिक भ्रष्टाचार करना सम्भव नही होगा।
कालेधन द्वारा धूर्त कुराजनीति व अन्य वित्तीय लूट करना असंभव हो जाएगा। क्योंकि फिजिकल करेंसी का वजूद खत्म होने पर देश की सरकारी व गैर सरकारी सम्पत्तियाँ छोटी-बड़ी वस्तुएँ स्वतः सरकार व नागरिकों द्वारा ऑनरिकॉर्ड खरीदी-बिक्री की जाने लगेंगीं।
इस परिस्थिति में दुनिया की कोई ताकत कालेधन के रूप में कोई भी वस्तु छिपाकर नही रख पाएंगे।
फेंक/नकली करेंसी का लाखों अरबों का कारोबार जो धूर्त कुराजनैतिक संरक्षण में फलफूल रहा है वो पूरी तरह बंद हो जाएगा।
टैक्सचोरी करवा के जो अपने उद्यमियों को अप्रत्यक्ष-प्रत्यक्ष फायदा करवाकर बदले में राजनैतिक चन्दा/डोनेशन का खेल खेला जाता है वो बंद हो जाएगा।
एक प्रतिष्ठित न्यूज़ डेटा के मुताबिक पिछले 7 सालों मौजूदा मोदी सरकार द्वारा देश के तमाम बदमाश व्यापारियों का लगभग 10 लाख करोड़ रुपया कर्जमाफ किया गया।
यदि 100% DCS लागू होता तो यह जानने-समझने में देर न लगती कि जिन व्यापारियों ने वित्तीय संस्थानों से भारी भरकम कर्ज लिया उसे खर्च कहाँ किया या उस धन का सदुपयोग किया या दुरुपयोग ..!
और तो और मौजूदा संसद/विधानसभाओं में पहुँचने वाले धूर्त/अपराधी नेताओं की संख्या पर पूर्णतः विराम लग जायेगा क्योंकि मौजूदा संसद व विधानसभाओं में लगभग सभी किसी न किसी प्रकार के मौद्रिक अपराध में संलिप्तता के चलते ही धनबल से पहुँचने में कामयाब हुए हैं।
उन्हें अच्छे से पता है कि यदि 100% डिजिटल करेंसी सिस्टम लागू करवा दिया गया तो आरोप-प्रत्यारोप की धूर्त कुराजनीति पूरी तरह से समाप्त हो जाएगी।
व सत्ताभोग का सिलसिला खत्म हो जाएगा।
फिर किस पे आरोप लगाकर जनता की नज़र में हीरो बनेंगे?
क्योंकि तब कोई भी आर्थिक भ्रष्टाचार करने की गुंजाइश ही नही बचेगी।
इस देश की भाजपाई संसद/विधानसभाओं में बैठे धूर्त/हरामखोर नेताओं के अलावा फैसलालयों में बैठे लगभग सभी फैसलाधीशों व वकीलों एवं देश के सभी चार्टेड अकॉउंटेंट्स एवं लगभग सभी विभागीय मंत्रालयों व सरकारी/गैर सरकारी वित्तीय संस्थानों को इस 100% डिजिटल करेंसी सिस्टम के लागू होने के बाद के फायदे पता हैं इसीलिए सब चुप्पी लगाकर बैठे हैं।
मेरे कई जानकार बड़े अधिकारी जो वित्तमंत्रालय व रिजर्व बैंक में कार्यरत हैं उनसे नाम न उजागर करने व ऑफ द रिकॉर्ड बात करने की शर्त पर बात अक्सर होती ही रहती है।
उनमें से हाल ही में RBI के एक बड़े पदाधिकारी से मिलने पर वार्ता हुई जिन्होंने बताया कि मौजूदा वित्तमंत्री व प्रधानमंत्री जानबूझकर इस कांसेप्ट को लागू नही करने देना चाहते क्योंकि उन्हें देश के बड़े उद्योग घरानों व अंतराष्ट्रीय आर्म्स कारोबारियों के कारण सरकार गिरने का डर है।
उन्होंने यह भी साफ़-साफ़ बताया कि देश की सम्पूर्ण केंद्रीय व राज्यीय राजनीति मौजूदा राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय उद्योग घरानों के चँगुल में फंसी है।
वित्तीय संकट बहुत ज्यादा बढ़ चुका है।
GDP नकारात्मक सूचकांक पर चल रही है।
देश का रेवेन्यू उतना नही आ रहा जितना अपेक्षाकृत है क्योंकि पिछले 7 सालों से केंद्र की वित्तीय अज्ञानता व अन्यायजनित नीतियों के चलते लगभग सारे उद्योग धंधे ठप्प पड़े हैं।
इसलिए इस कांसेप्ट पर पूरी तरह से सरकारी चुप्पी है।
अंत में उनका फाइनल स्टेटमेंट सिंगल लाइन का था कि
“”सबकुछ नॉर्मल भी हो जाएगा तब भी मौजूदा भाजपा शासनसत्ता व इनकी सरकारी मशीनरी ये कांसेप्ट लागू होने नही देगी।”” क्योंकि इनका पूरा सिस्टम ही करप्शन पर टिका हुआ है।
विचारणीय–
यदि आप-हम सब जान चुके हैं कि किसी बीमारी का स्थायी ईलाज क्या है फिर भी बीमारी को परमानेंट खत्म करने के बजाय टेम्परेरी विकल्पों पर व्यर्थ समय व धन गवाँ रहे हैं तो फिर…
अपराधी कौन???
सोंचिए…. ज्यादा सोंचिये….और ज्यादा सोंचिये…यदि मरा हुआ ज़मीर काम करने की इजाज़त दे तो असली काम पर अभी लग पड़े….!!
आइए मिलकर देश को एक नई राजनीति के जननायक आदरणीय अरविंद केजरीवाल जी को 2024 में प्रधानमंत्री की कुर्सी पर पहुंचाने हेतु संकल्प लें व देश मे आमआदमीपार्टी की सरकार को चुनें।
क्योंकि एकलौते केजरीवाल जी ही हैं जो इस स्थाई समाधान को देश में लागू कर पाने में सक्षम हैं व राजनीतिक निष्ठावान हैं।
✍ (राम गुप्ता – स्वतंत्र पत्रकार)
अति साधारण कार्यकर्ता/प्रचारक
आम आदमी पार्टी, उत्तरप्रदेश