बात मुद्दे की होनी चाहिए, मुद्दई की नहीं

पास्ट की, भूत की बात करने लगोगे तो सिर्फ सोनम वांगचुक ही नहीं कई का इतिहास स्याह रहा है, बल्कि बेहद संदेहास्पद रहा है। जो आज हीरो बने बैठे हैं, वे कल के खलनायक थे।

इनके तो पिता ही विपक्षी दल के थे। महाराष्ट्र से लेकर असम, बंगाल से लेकर बिहार, यहां तक कि उत्तर प्रदेश के भी कई बड़े नेता के पिता तो छोड़िए वे स्वयं विपक्षी दल में रहे हैं। समाजसेवा के लिए नहीं बल्कि अपने स्वार्थ के लिए उन्होंने पाला बदला है। हमारी बैसवारी में कहें तो- “सब फल खाय, धतूरे में लटके हैं।”

जहां तक इनकी शिक्षा की बात है, पेटेंट की बात है। आम जनता के लिए, भारतीयों के लिए वह कोई मुद्दा ही नहीं है। बिहार इसका सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है। जितना अनपढ़, उतना लोकप्रिय। नेताओं की बात न भी करें तो अन्ना हजारे कौन सा पीएचडी थे। साधारण सैनिक ही तो थे। पर उनका मुद्दा सही था, इसलिए लोग उनसे जुड़े। लाखों, करोड़ो लोग जुड़े। देश-विदेश के लोग जुड़े। हर वर्ग, समाज, आयु के लोग जुड़े।

सोनम वांगचुक का मुद्दा बिल्कुल जेन्युइन है। पेपर लीक से देश का एक बड़ा तबका प्रभावित होता है। बच्चे तो तनाव में आते ही हैं, उनको दुःखी देख बड़े भी दुःखी होते हैं। समाज के सभी वर्गों के बच्चे प्रभावित होते हैं। पेपर लीक- आरक्षण, अल्पसंख्यक, अगड़ा-पिछड़ा के आधार पर भेदभाव नहीं करता है। चाहे 85 हो या 15, सभी को बराबर कष्ट देता है।

इसलिए हम तो इस मुद्दे के साथ हैं। सोनम वांगचुक उठा रहे हैं इसलिए उनके साथ हैं। आप उठाइये, विनय सिंह बैस आपके साथ हो जाएंगे। इसमें हम कोई जाति, धर्म, पहाड़ी, मैदानी नहीं देखेंगे। जन हित का मुद्दा है, तो जनता साथ देगी ही। इस तरह के मामलों में किसी भी ‘सोनम’ से कोई बेवफ़ाई न करेगा।

लेकिन सोनम जी, जब इतना मजबूत मुद्दा, जन आक्रोश आपके साथ था। केजरीवाल के कांड से ठगी, सहमी, धोखा खाई जनता का समर्थन भी धीरे-धीरे ही सही मिल ही रहा था। तो फिर आपको लव जिहाद के ब्रांड एम्बेसडरों को मंच पर बुलाने की क्या जरूरत आन पड़ी। ‘नाम रहेगा सिर्फ हल्ला का’ बुलवाने की क्या जरूरत थी। ‘सीता और गीता के पति’ जैसे सस्ते, भद्दे और सनातन का घोर अपमान करने वाले जोक पर ही-ही, खी-खी करने की क्या मजबूरी थी??

आपको जिस तरह से बलपूर्वक उठाया गया, हमें दुःख होना चाहिए था, पीड़ा होनी चाहिए थी। आखिर आप हमारे लिए ही तो लड़ रहे थे। लेकिन सोनम जी ऐसा हो न सका। आपने वामपंथी गैंग को, टुकड़े-टुकड़े गैंग को, jहादी गैंग को अपना आंदोलन हाईजैक करने की मौन सहमति देकर अपनी इज्जत खुद ही मटियामेट कर ली।

वेरी सॉरी सोनम जी! हम नहीं, आप ‘बेवफा’ निकले।

(आशा विनय सिंह बैस)