भाव, वर्ण के समन्वय से, मैं शब्द नए पिरोता हूँ

November 3, 2017 0

जगन्नाथ शुक्ल, इलाहाबाद- वर्ण की अँधेरी खोह में , नित भाव प्रसून उगाता हूँ। भाव, वर्ण के समन्वय से, मैं शब्द नए पिरोता हूँ ।। शब्द जोड़ जोड़कर , कविता रसधार बहाता हूँ। हिन्दी माता […]