पं० मोतीलाल नेहरू की पुण्यतिथि (६ फ़रवरी) की स्मृति मे
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
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बहुत कम लोग जानते हैँ कि देश को स्वतन्त्रता दिलाने मे पं० जवाहरलाल नेहरू के पिता पं० मोतीलाल नेहरू की विशेष भूमिका थी। अँगरेज़-राज के विरुद्ध जितनी भी नीति बनती थी और निर्णय किये जाते थे, उसका केन्द्रस्थल प्रयागराज-स्थित आनन्दभवन हुआ करता था, जिसका निर्माण पं० मोतीलाल नेहरू ने वर्ष १९३० मे कराया था। महात्मा गांधी पं० नेहरू को प्रत्यक्ष-परोक्ष अपनी समस्त योजनाओँ से अवगत कराते रहते थे।
एक बार की बात है, महात्मा गांधी २० जनवरी, १९२० ई० को इलाहाबाद पहुँचे थे, जिसका उद्देश्य इलाहाबाद मे आकर पं० मोतीलाल नेहरू से मिलकर उन्हेँ पंजाब मे हत्याकाण्ड के फलस्वरूप देश मे असन्तोष और मुसलमानो मे 'विरोध' को लेकर फैल रही उग्र भावनाओँ से अवगत कराकर परामर्श करना था। उसके बाद पं० मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता मे इलाहाबाद मे एक सार्वजनिक सभा का आयोजन किया गया था, जिसमे महात्मा गांधी, इंग्लैण्ड के कर्नल वेजउड, मौलाना आज़ाद तथा शौकत अली की भी भागीदारी थी। उस समय पं० मोतीलाल नेहरू ने स्पष्ट शब्दोँ मे कहा था– अब हमे एक कठोर नीति बनानी पड़ेगी, वरना अँगरेज़ोँ का अत्याचार बढ़ता ही रहेगा और वे यहाँ से जाने का नाम नहीँ लेँगे।
समय व्यतीत होता रहा। अँगरेज़-शासन और प्रशासन ने पं० मोतीलाल नेहरू के विरोधी दृष्टिकोण को भाँप लिया था; फलस्वरूप उन्हेँ कारागार मे डाल दिया गया। वहाँ वे अस्वस्थ हो गये; उनका स्वास्थ्य गम्भीर हो गया; अन्तत:, उन्हेँ कारागार से मुक्त करना पड़ा था। जैसे ही इसका संज्ञान गांधी जी को हुआ था, वे इलाहाबाद के लिए प्रस्थान कर गये थे। उन्हेँ देखते ही गांधी जी बोल पड़े थे, “आप यदि इस ख़तरे को पार कर गये तो हम निश्चय ही स्वराज प्राप्त कर लेँगे।” इस पर मोतीलाल जी ने कहा, “महात्मा जी! मै तो शीघ्र ही जा रहा हूँ।”
गांधी जी कार्यकारिणी की बैठक बम्बई मे करना चाहते थे; इस पर मोतीलाल जी ने गांधी जी से कहा,”भारत के भाग्य का निर्णय ‘स्वराज-भवन’ मे करो। मेरे सामने करो और मेरी मातृभूमि के सम्मानपूर्ण अन्तिम समझौते मे मुझे भी भाग लेने दो।”
अफ़्सोस! पं० मोतीलाल नेहरू का स्वस्थ्य गिरता ही रहा; अन्तत:, ६ फरवरी, १९३१ ई० को उनका शरीरान्त हो चुका था। उनकी चिता की ओर संकेत करते हुए, महात्मा गांधी ने कहा था, “यह चिता नहीँ, ‘राष्ट्रयज्ञ’ का हवनकुण्ड’ है।”
उस महापुरुष की स्मृति मे प्रयागराज मे मोतीलाल नेहरू चिकित्सालय, मोतीलाल नेहरू मार्ग आज भी अपने अस्तित्व मे है। इसके अतिरिक्त लखनऊ मे मोतीलाल नेहरू बाल-संग्रहालय स्थित है।
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