हेरम्ब मिश्र-स्मृति शिखरसम्मान-समारोह सम्पन्न

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“पत्रकारोँ के बिना किसी राष्ट्र का विकास नहीँ हो सकता”– महेन्द्र सिंह
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“मुझे प्रयागराज विश्व मे सबसे अच्छा लगता है। आप प्रयागक्षेत्र मे चले जाइए, वहाँ गंगा-यमुना से अधिक सरस्वती का ही दर्शन होता है। यहाँ एक से बढ़कर साहित्यकार, पत्रकार और शिक्षाशास्त्री हैँ, जो अपनी मेधा और प्रतिभा के बल पर कई त्रिवेणी बसा लेने की क्षमता रखते हैँ। हेरम्ब मिश्र जी भी उसी परम्परा से आते हैँ, जो राष्ट्र के स्वस्थ-निर्माण के प्रति चिन्तन और चिन्ता करते थे; क्योँकि वे जानते थे कि पत्रकारोँ के बिना किसी राष्ट्र का विकास नहीँ हो सकता।”
ये उद्गार थे, पं० हेरम्ब मिश्र-स्मृति पत्रकारिता-संस्थान की ओर से आयोजित शिखर-सम्मान मे मुख्य अतिथि के रूप मे विचार प्रकट कर रहे संयुक्त शिक्षा निदेशक महेन्द्रकुमार सिंह के। समारोह की अध्यक्षता कर रहीँ प्रख्यात शिक्षा और समाजसेवी डॉ० संतोष गोइन्दी ने कहा– आज हमारी पीढ़ी को अपनी संस्कृति को देखते हुए, अपनी अस्मिता और अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़नी है, जिसमे स्वस्थ पत्रकारिता की महती भूमिका है। इसकी विचारधारा गांधी जी ने समाज को दी थी। उन्होँने अफ्रीका से स्वदेश लौटने के पश्चात् एक नयी संवेदना के साथ पत्रकारिता का बीज-वपन किया था। उन्होँने ‘इण्डियन ओपिनियन’, ‘यंग इण्डिया’ इत्यादिक समाचारपत्रोँ के माध्यम से आज़ादी की लड़ाई जिस तरह से लड़ी थी, उसी प्रकार की लड़ाई आज के पत्रकारोँ को लड़नी होगी। हमे नहीँ भूलना चाहिए कि पत्रकारिता मे बहुत शक्ति है। समाज को बदलने की जिसमे शक्ति है, लोग उससे घबराते हैँ। हेरम्ब मिश्र जी सुखी समाज को विकसित करने के लिए बेचैन रहते थे।
आरम्भ मे आकाशवाणी और दूरदर्शन, इलाहाबाद के पूर्व-केन्द्र-निदेशक डॉ० लोकेश शुक्ल ने शास्त्रीय सरस्वती-वन्दना कर परिवेश को संगीतमय बना दिया था। अतिथियोँ का स्वागत करते हुए, संस्थान-निदेशक ने अपने पिता पं० हेरम्ब मिश्र की पत्रकारीय प्रवृत्ति पर सविस्तार प्रकाश डाला था।
दो सत्रोँ मे आयोजित समारोह का प्रथम चरण सम्मान-कार्यक्रम का था और द्वितीय चरण बौद्धिक परिसंवाद का। समारोह-संयोजक-संचालक व्याकरणवेत्ता एवं भाषाविज्ञानी आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने मुख्य अतिथि, अध्यक्षा एवं सम्मानित किये गये समस्त प्रतिभाओँ का परिचय प्रस्तुत किया।
मुख्य अतिथि महेन्द्रकुमार सिंह और अध्यक्षा डॉ० संतोष गोइन्दी ने पत्रकारिता के क्षेत्र मे विशिष्ट योगदान करनेवाले राकेश कुमार और रामलखन गुप्त को वर्ष २०२५ के पत्रकारिताशिखर-सम्मान, साहित्य के क्षेत्र मे उल्लेखनीय उपलब्धि-हेतु शिवराम उपाध्याय ‘मुकुल’ को साहित्यशिखर-सम्मान एवं मीडिया-क्षेत्र मे महत्त्वपूर्ण योगदान कर रहे पंकज श्रीवास्तव को युवा-मीडियाशिखर-सम्मान से सुशोभित किया, जिसके अन्तर्गत विशिष्ट माला, नारिकेल, शाल, स्मृतिचिह्न और सम्मानपत्र सम्मिलित थे। इसके पूर्व अध्यक्षा डॉ० संतोष गोइन्दी ने मुख्य अतिथि महेन्द्र सिंह को विशिष्ट माला, शाल और स्मृतिचिह्न भेँटकर उनका अभिनन्दन किया। हेरम्ब मिश्र की पत्नी की स्मृति मे पहली बार आरम्भ किये गये ‘शिक्षा-समाजसेवासमर्पण-सम्मान से डॉ० संतोष गोइन्दी को अलंकृत किया गया। इसी अवसर पर सम्मान-प्राप्त समस्त विशिष्टजन ने अपना-अपना विचार व्यक्त किया था।
द्वितीय चरण मे ‘हिन्दी-पत्रकारिता : तब और अब’ विषय पर विचार व्यक्त करते हुए, रायबरेली से पधारीँ शिक्षाविद् किरण शुक्ल ने कहा– पहले की पत्रकारिता कठिन थी; क्योँकि तब आज जैसा संसाधन उपलब्ध नहीँ था।
वरिष्ठ पत्रकार सुनील श्रीवास्तव ने कहा– हम यह तय नहीँ कर पाये हैँ कि हमारी पत्रकारिता कैसी हो। इसका मुख्य कारण है कि देश, काल, परिस्थिति और पात्र के अनुसार हमारी भाषा हमसे छीजती जा रही है। मै सोसल मीडिया को पत्रकारिता नहीँ मानता; क्योँकि उसकी भाषा कृत्रिम है।
मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, प्रयागराज की राजभाषा अधिकारी एवं सहायक निदेशक प्रमोद द्विवेदी ने कहा– पहले अन्धविश्वास, कुरीतियोँ के विरुद्ध पत्रकार लड़ता था, अब सामाजिक विद्वेष के विरुद्ध लड़ता दिख रहा है। तब पत्रकारिता के साथ साहित्य जुड़ा रहता था, अब बाज़ार जुड़ा रहता है।
वरिष्ठ पत्रकार अमरनाथ झा ने पत्रकारिता : संकट और संत्रास का जीवन्त शब्दचित्र खीँचा था। वरिष्ठ छायापत्रकार अरविन्द मालवीय ने कहा– पहले का पत्रकार चिन्तन और चिन्ता करता था, जबकि आजका पत्रकार केवल चिन्ता करके रह जाता है।
अन्त मे, गत वर्ष शिखर-सम्मान से आभूषित शिक्षाविद्,चिन्तक-विचारक प्रेमशंकर खरे की पिछले दिनो निधन होने से समारोह मे उनके प्रति मौन शोकसंवेदना व्यक्त की गयी, तत्पश्चात् राष्ट्रगान-गायन कर समारोह समापन की घोषणा की गयी।
इस अवसर पर दैनिक समाचारपत्र ‘न्यायाधीश-परिवार’ की ओर से दर्शकोँ से भरे सभागार मे नये वर्ष का कैलेण्डर भेँट किया गया।
इस अवसर पर प्रो० व्यासजी द्विवेदी, रामेन्द्र कुशवाहा, रेणुका कुशवाहा, मुनेश्वर मिश्र, मीनाक्षी मिश्र, निशा पाण्डेय, चकोरी शुक्ल, भाव्या, भुवि, बबली, शशिधर मिश्र, रेणुका, प्रबोध मानस, उर्वशी उपाध्याय, डॉ० शीलप्रिय त्रिपाठी, शाम्भवी, अंशु, पुनीत श्रीवास्तव, डॉ० अभिषेक केसरवानी, राजेश पाण्डेय, डॉ० वीरेन्द्र तिवारी इत्यादिक शताधिक संख्या मे प्रबुद्धजन उपस्थित थे।