ग़ज़ल : उन्हें फ़िक्र क्यों रही ?
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय – हम रहगुज़र हैं अपने, उन्हें फ़िक्र क्यों रही, मंज़िल बनी है अपनी, उन्हें फ़िक्र क्यों रही ? घर-बार अपना छोड़कर, वीराने में आ गये, रिश्तों की दुहाई की, उन्हें फ़िक्र क्यों […]
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय – हम रहगुज़र हैं अपने, उन्हें फ़िक्र क्यों रही, मंज़िल बनी है अपनी, उन्हें फ़िक्र क्यों रही ? घर-बार अपना छोड़कर, वीराने में आ गये, रिश्तों की दुहाई की, उन्हें फ़िक्र क्यों […]