● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
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ख़ाली पदोँ को कब भरवाओगे? महँगाई अपनी चरम सीमा की ओर भाग रही है; नियन्त्रण के लिए कौन-सा मार्ग अपनाये हो? तुम्हारे देश की आर्थिक स्थिति चरमरा चुकी है; रिश्वतख़ोरी, अकर्मण्यता, हर प्रकार का अपराध, बेरोज़गारी चरम पर हैँ; मौन क्योँ बने रहते हो? कौए की जीभ खाकर आये हो क्या? सत्ता के प्रति इतने मोहित क्योँ रहते हो? ‘विश्वगुरु’ के नाम पर ‘मोहल्ले-गुरु’ के स्तर का परिचय क्योँ देते रहते हो? लोकतन्त्र की आवाज़ पर पहरा क्योँ बैठाते रहते हो? व्यवस्थापिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका एवं मीडियापालिका को अँगूठे पर क्योँ नचाते आ रहे हो? अपने देश के समस्त संवैधानिक-असंवैधानिक तन्त्रोँ के साथ खेलवाड़ क्योँ करते आ रहे हो?
वर्ष २०१४ से नाम ही तो बदलते आ रहे हो; काम करने की शैली और अपना चरित्र कब बदलोगे?
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १४ दिसम्बर, २०२५ ईसवी।)
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