क्या अन्याय पर आपकी चुप्पी और निष्क्रियता आपको अन्याय के प्रति सहमत सिद्ध नहीं करती?

“अमृत महोत्सव” नही यह “विष महोत्सव” है…

सम्पूर्ण उत्तरप्रदेश राज्य में घोर अन्याय व्याप्त है।
प्रथमतः मुख्य चार जनाधिकारों पर ही यहाँ मैं आपका ध्यान आकर्षित कर रहा हूँ।
कुछ विचार कीजिए…!

1◆ राज्य में एक व्यक्ति को पूर्ण शिक्षा-प्रशिक्षण मिल रहा है वहीं दूसरे को नहीं क्यों?

2◆ राज्य में एक परिवार को रोजगार के सभी अवसर व संसाधन (कर्म-पद-संपदा) मिल रहे हैं दूसरे को नहीं क्यों?

3◆ राज्य में एक बस्ती/मोहल्ले को अच्छी सड़क, पीने का साफ पानी, समुचित बिजली, संचार (इंटरनेट), परिवहन जैसी अनेकों सार्वजनिक सेवाएं-सुविधाएँ मिल रही हैं वहीं दूसरे बस्ती-मोहल्ले को नहीं क्यों?

4◆ राज्य में एक वर्ग को चिकित्सा, सुरक्षा, बीमा, बैंकिंग आश्रय इत्यादि संरक्षण सेवाएं मिल रही हैं वही तमाम दूसरे वर्गों को नहीं क्यों?

क्या उपरोक्त चारों बातों से राज्य की व्यवस्था में अन्याय का लक्षण सिद्ध नही हो रहा?

कृपया केवल ‘हाँ’ या ‘न’ में उत्तर दें..!

यदि आपका उत्तर हाँ है तो बताएं की आप अन्याय की दशा को राज्य की व्यवस्था में क्यों स्वीकार किये बैठे हैं..?

क्या यह चुप्पी और निष्क्रियता आपकी कायरता को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं है..?

माना की ‘अन्याय’ के विरुद्ध लड़ना ठीक नहीं है किन्तु ‘न्याय’ की प्रतिष्ठा के लिए प्रयत्न करना और जो संघठन/पार्टी सत्यात्मक रूप से प्रयास कर रही है जिसका उदाहरण दिल्ली में न्यायशील नेतृत्व देकर सिद्ध भी किया है। तो अब बताइये क्या मानव होने के नाते आपका कर्त्तव्य सिद्ध ही होता है।

दुनिया के प्रायः 95% लोग आज घनघोर अन्याय के अंधकार से ग्रस्त और त्रस्त हैं। वे शिक्षा, रोजगार, सुविधा और संरक्षण के अवसर व सांसाधनों से वंचित हैं। उनको विभिन्न सरकारों द्वारा चारों न्यायशील जनाधिकारों की तुरंत आवश्यकता थी लेकिन आज़ादी के 75 वर्ष बीत जाने के बाद भी यह पूरा न किया जा सका और आज हमारे देश के प्रधानमंत्री जी द्वारा उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ में आज़ादी का “अमृतमहोत्सव” मनाया जा रहा है..!

क्या यह अमृतमहोत्सव राज्य की 95% जनता के उपरोक्त चारों सार्वजनिक जीवनोपयोगी सरोकारों (जनाधिकारों) को पूरा करने की खुशी में मनाया जा रहा है यदि नही तो फिर इसे “अमृतमहोत्सव” के बजाय “विषमहोत्सव” कहना ज्यादा उचित होगा।

वास्तव में प्रदेश की जनता की मूलभूत रोजमर्रा की जरूरतों को सुचारू व सुलभ बनाना ही मात्र दायित्व होना चाहिए था लेकिन अबतक किसी 1 राज्य सरकार ने इसे पूरा नही किया।

लेकिन अब प्रदेश की जनता जानकार व जागरूक हो चुकी है उसे अपने चारों जनाधिकारों के महत्व का सतज्ञान हो चुका है और उसे यह भी पता चल चुका है कि उत्तरप्रदेश की जनता के ये चारों जनाधिकारों (उच्च गुणवत्तापरक व रोजगारपरक शिक्षा व्यवस्था, उच्च गुणवत्तापरक सड़के, मुफ्त बिजली, मुफ्त पीने का साफ़ पानी, मुफ्त परिवहन सुविधा, उच्च गुणवत्तापरक स्वास्थ्य सेवाएँ एवं डोरस्टेप सरकारी सेवाएँ) को सर्वसुलभ कराने के उद्देश्य को पूरा करने वाली आमआदमीपार्टी ही एक मात्र राजनैतिक संघठन है।

यही कारण है कि परम् आदरणीय राज्यसभा सांसद व प्रदेश प्रभारी श्री संजय सिंह जी के नेतृत्व में उत्तरप्रदेश में बड़ी तेजी से आमआदमीपार्टी का संघठन मजबूत हो रहा है हर घर से कम से कम 1 सदस्य अपने समर्पण भाव से पार्टी संघठन से जुड़कर अपना निःस्वार्थ योगदान देने हेतु जुड़ रहा है।

मुझे पूर्ण विश्वास है आगामी 2022 के विधानसभा चुनाव का परिणाम दिल्ली जैसा ही चमत्कारिक सिद्ध होगा।
आओ मिलकर न्याय का समर्थन करें।
न्याय को ही अपना राष्ट्रीय धर्म घोषित करें।

🙏 राम गुप्ता – स्वतंत्र पत्रकार
साधारण कार्यकर्ता/प्रचारक
आम आदमी पार्टी, उत्तरप्रदेश