प्रयागराज। उत्तर प्रदेश की न्यायपालिका को हिला देने वाली एक गंभीर घटना इलाहाबाद हाईकोर्ट में सामने आई है। कोडीन युक्त कफ सिरप के अवैध कारोबार से जुड़े बहुचर्चित माफिया केस की जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान न्यायालय तक सीधे पहुंच बनाकर फैसले को प्रभावित करने की कोशिश का खुलासा हुआ। अदालत ने इस पूरे प्रकरण को “न्यायपालिका के इतिहास का ब्लैक डे” बताया है।
यह केस कोडीन युक्त कफ सिरप के अवैध निर्माण, बिक्री और तस्करी से जुड़ा है। इस रैकेट पर आरोप है कि नशीली खांसी की दवा को बड़े पैमाने पर बेचकर युवाओं को नशे की लत लगाई जा रही थी। मामले में करोड़ों रुपये के लेन-देन और मनी लॉन्ड्रिंग के भी आरोप हैं। प्रवर्तन निदेशालय और यूपी पुलिस की एसटीएफ कई महीनों से इस नेटवर्क की जांच कर रही है।
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट के संज्ञान में आया कि सुनवाई से पहले कुछ लोगों ने बिचौलियों के जरिए पीठासीन जज तक पहुंचने और मामले को प्रभावित करने की कोशिश की थी। इस बात पर कड़ी नाराजगी जताते हुए सुनवाई कर रहे न्यायाधीश ने खुली अदालत में कहा कि “न्यायपालिका की निष्पक्षता और स्वतंत्रता से समझौता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
न्याय की शुचिता बनाए रखने के लिए जज ने खुद को इस हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई से अलग कर लिया। कोर्ट ने तुरंत पूरी केस फाइल माननीय मुख्य न्यायाधीश को भेज दी है। अब मुख्य न्यायाधीश के आदेश पर एक नई बेंच का गठन कर जमानत याचिका पर दोबारा सुनवाई होगी।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि जज का यह कदम न्यायपालिका की पारदर्शिता और जवाबदेही को दर्शाता है।
मास्टरमाइंड दुबई में, जांच पर सवाल
इस पूरे रैकेट का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि इसका मुख्य आरोपी और कथित मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल अभी भी फरार है। खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार, शुभम जायसवाल दुबई में रह रहा है और वहीं से अपने नेटवर्क को ऑपरेट कर रहा है।
आरोप है कि वह दुबई से ही भारत में बैठे अपने सहयोगियों के जरिए गवाहों और सिस्टम पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। ईडी ने उसकी संपत्तियों को कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और इंटरपोल के जरिए रेड कॉर्नर नोटिस जारी करवाने की तैयारी भी है।
हालांकि जांच एजेंसियां लगातार छापेमारी कर रही हैं, लेकिन माफिया की विदेश तक पहुंच और जांच की धीमी गति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं:
- इतने बड़े रैकेट को इतने समय तक कैसे चलने दिया गया?
- फरार आरोपी विदेश से सिस्टम को कैसे प्रभावित कर रहा है?
- नशीली दवाओं की सप्लाई चेन को तोड़ने के लिए और क्या कदम उठाए जाएंगे?
आगे क्या होगा?
अब सभी की निगाहें इलाहाबाद हाईकोर्ट की नई बेंच पर हैं। साथ ही ईडी और यूपी पुलिस की संयुक्त जांच में यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि जज तक पहुंच बनाने की इस साजिश में और कौन-कौन लोग शामिल थे।
यह घटना एक बार फिर इस बात को रेखांकित करती है कि संगठित माफिया और नशे का कारोबार न सिर्फ समाज के लिए खतरा है, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ न्यायपालिका के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन गया है।