
मैं लेफ्टिनेंट पुरुशार्क सुयाल और मेरी प्यार माँ श्रीमती अर्चना सुयाल, जो कि बहुत प्यार करती है मुझे,
मेरी माँ, मेरे जीवन की पहली गुरु है।
माँ बहुत अच्छी टीचर है, उन्होंने मुझे जीवन की हर सीख दी है,
मैं चाहे बोलू या ना ना बोलूँ, माँ मेरे दिल की हर बात समझ जाती है,
मेरी हर पसंद ना पसंद का ख्याल रखती है,
जब भी माँ का फोन आता है तो बस यहि पूछती है कि मैंने खाना खाया या नहीं, और कोइ भी बात नहीं पूछती है जब मैं घर से बाहर होता हूँ,
मैं आज जो भी हूँ, मैं के प्यार और त्याग के कारण ही हूँ,
उनके संस्कार के कारण ही आज मैं देश के लिए अपनी सेवाएं दे रहा हूं,
माँ के लिए मेरा सब कुछ कुर्बान है,
माँ के चरणों में सारा जग समाया हुआ है।
मेरी प्यार माँ।
–उषा श्रीवास्तव