“सब उपमा कवि रहे जुठारी,
केहि पटतरौं बिदेहकुमारी।”
जिन सीता मां की सुंदरता का वर्णन करने के लिए महाकवि तुलसीदास को उपमा ढूंढे नहीं मिल रही है।
जिन सीता मां के सौंदर्य का वर्णन महर्षि वाल्मीकि कुछ इस तरह करते हैं:
कनकवर्णांगी, नीलकेशी, बिम्बोष्ठी, सुमध्या, पद्मपलाशाक्षी।
(स्वर्ण जैसी कांति, नील कमल जैसे काले लंबे केश, बिम्ब फल जैसे अरुण अधर, कमल दल जैसे नेत्र।)
जिन सीता मां को देखकर अहंकारी राक्षस रावण भी सहसा कह उठा – “सातों लोकों में ऐसी नारी नहीं देखी, जिसके केशों में भौंरे मंडराते हों और नेत्र हिरण को भी लजाते हों।” (कंब रामायण)
जिनकी सुंदरता का वर्णन पद्म पुराण में कुछ यूं किया गया है –
“वह लक्ष्मी, जो करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्विनी, रक्त कमल जैसे हाथों वाली, जो जनक के हल से खेत जोतते समय प्रकट हुई – वह इस समस्त विश्व के उद्धार के लिए आई है।”
जिन सीता मां के मुख की तुलना चंद्रमा से करने पर स्वयं श्रीराम रुष्ट होकर कहते हैं- “हे चंद्रमा, तुझमें तो घटने-बढ़ने का दोष है, तुझे राहु ग्रसता है, तू चकवा-चकवी को विरह देता है, कमल को मुरझाता है। तुझमें बहुत दोष हैं। जो तेरी तुलना मेरी सीता के मुख से करे, वह महा अपराध करता है।”
जिन सीता मां की वन में खोज करते हुए मर्यादा पुरुषोत्तम राम फूलों से पूछते हैं – “तुमने मेरी प्रिया को देखा? उसकी मुस्कान बिल्कुल तुम्हारी तरह है।”
नाग से कहते हैं – “मेरी सीता के लंबे काले केश तुम्हारे शरीर जैसे सुंदर और श्यामल हैं।”
हिरण से कहते हैं – “हे सुंदर हिरण, तुम्हारी जैसी ही चंचल और सुंदर आँखें हैं मेरी सीता की। क्या तुमने उसे देखा?”
सीता मां केवल सुंदर नहीं, सौंदर्य की जननी हैं। वे भूमिजा हैं – धरती जैसी सहनशील, क्षमाशील और करुणामयी। उनका सौंदर्य बाहरी नहीं, उनके शील, त्याग, धैर्य और पतिव्रत से उपजा तेज है।
अब अवध निवासी विनय सिंह बैस का प्रश्न यह कि क्या ‘Ravana was not so bad’ कहने वाली ‘Ramayana’ मूवी की अदाकारा साई पल्लवी में आपको सीता मां के बाह्य या आंतरिक सौंदर्य का खराबांश भी नजर आता है??
—विनय सिंह बैस