डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव–
अगर ऐशोआराम की चाहत है, तो प्रेम नहीं, सौदा करना,
दिल देकर फिर दिल तोड़ना क्या, बेहतर है किनारा करना।
जहाँ मोहब्बत की कीमत हो, वहाँ हिसाब नहीं चलता,
सच्चे दिल के रिश्तों में, कोई व्यापार नहीं चलता।
प्रेम नहीं तो शादी मत करना, किसी की दुनिया मत उजाड़ना,
झूठे सपनों के फूल सजाकर, किसी का दिल मत तोड़ना।
शादी केवल रस्म नहीं है, दो जीवन का साथ है,
एक-दूजे की इज़्ज़त करना, प्रेम भरी सौगात है।
प्रेम करो तो दिल से करना, वादों को आधार बनाकर,
सुख में दु:ख में भी रहना, हाथों में हाथ मिलाकर।
रिश्ते महलों से नहीं बनते, बनते हैं विश्वास से,
घर स्वर्ग बन जाता है साथी, सच्चे प्रेम के एहसास से।
शादी के बाद बदलते हैं, रिश्तों के मायने सारे,
पुराने कुछ पीछे छूटे, नए बने जीवन के सहारे।
माँ-बाप की दुआएँ भी हों, जीवनसाथी का मान रहे,
दोनों घरों की खुशबू से ही, अपना घर गुलज़ार रहे।
पर जो बीते कल में उलझे, आज को अपना न पाए,
नये रिश्ते की डोर पकड़कर, गाँठ पुरानी खोल न पाए।
तो बनते-बनते रिश्ते भी, पल भर में बिखर जाते हैं,
तन से साथ भले हों दोनों, मन से दूर हो जाते हैं।
न पुराने रिश्ते दुश्मन हैं, न नये कोई पराए,
बस हर रिश्ते को उसका हक़ दो, झो दिल में प्रेम जगाए।
जो बीत गया, उसको जाने दो, जो आज उसे अपनाओ,
कल की यादों में खोकर तुम, न अब का प्रेम गँवाओ।
न दौलत से, न शोहरत से, न ऊँचे किसी मकान से,
रिश्ते ज़िंदा रहते हैं बस, दिल के सच्चे सम्मान से।
जहाँ अहंकार पिघल जाता है, वहाँ प्यार मुस्काता है,
दोनों जब एक-दूजे को चुनें, घर मंदिर बन जाता है। म
ऐशोआराम चाहिए तो, दिल का सौदा मत करना,
प्रेम अगर न सच्चा हो, किसी के मत तुम बनना।
शादी करना तब जब मन मे हो प्रेम निभाने का विश्वास,
रिश्ते जुड़ते हैं वर्षों में, एक पल मे बन जाते हैं लाश।
प्रेम कोई सौदा नहीं, ये जीवन का सम्मान है,
सच्चा दिल ही इस दुनिया मे प्रेम की पहचान है।