“पत्रकारों को क्या ‘पार्टी’ बनना चाहिए”
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आज एक विचित्र-सा सम्प्रेषण देखा, जो दैनिक जागरण, इलाहाबाद में महाप्रबन्धक रह चुके श्रीवास्तव जी का है, जिसका शीर्षक उपर्युक्त है। वे क्या कहना चाहते हैं, कुछ सुस्पष्ट नहीं है। बहरहाल, मैंने […]