चौराहे पर खड़ी जवानी
जग का दुःख है रोया हमने, अपना दुखड़ा भूल गये। उस पथ के पथराही हैं हम; जिस पथ में नित शूल नये। सारा सावन आँखों में ही, रुक कर मानो सूख गया। इतने पर भी […]
जग का दुःख है रोया हमने, अपना दुखड़ा भूल गये। उस पथ के पथराही हैं हम; जिस पथ में नित शूल नये। सारा सावन आँखों में ही, रुक कर मानो सूख गया। इतने पर भी […]