‘डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला’ में जानें शब्दों का शुद्ध रूप
“लम्हों ने ख़ता की, सदियों ने सज़ा पायी” शताब्दियों से हमारे अधिकतर विद्वज्जन, शिक्षकवर्ग लेखकगण तथा विद्यार्थीवृन्द उच्चारण और लेखनगत अनुशासन की अवहेलना करते आ रहे हैं, जो कि सर्वथा अनुचित है; कारण कि अधिकतर […]