आइए! सत्य-संधान करें
— आचार्य पंडित पृथ्वीनाथ पाण्डेय प्राय: सत्य स्वयं में नितान्त कटु होता है। इसका आयाम बृहद् है— कहीं मृदु अनुभव होता है और कहीं कठोर। यहीं पर सत्य की प्रियता-अप्रियता की, यापित काल-खण्डों में गहन […]
— आचार्य पंडित पृथ्वीनाथ पाण्डेय प्राय: सत्य स्वयं में नितान्त कटु होता है। इसका आयाम बृहद् है— कहीं मृदु अनुभव होता है और कहीं कठोर। यहीं पर सत्य की प्रियता-अप्रियता की, यापित काल-खण्डों में गहन […]
महेन्द्र महर्षि- किसी ने बर्फ़ से पूछा, “तुम इतनी ठण्डी क्यों हो” ? बर्फ़ का जबाब था , मेरा भूत भी पानी, वर्तमान -पिघलता पानी और भविष्य का कल भी पानी, तो गरम होकर क्या […]